Published in Navbharat Times 18th October 2026
...ब्रेकफ़ास्ट कब ब्रंच बन जाता है, पता नहीं चलता। एक गैलरी दूसरी तक ले जाती है, और डिनर न जाने कैसे किसी ऐसे छोटे से दरवाज़े के पीछे खत्म होता है जिसे आप लगभग...
‘बताइए, आपको यहाँ बुलाने के लिए मुझे क्या करना होगा?’ टैंगलूमा आइलैंड रिज़ॉर्टवाले मेरे दोस्त चैड का फ़ोन था, और वो बड़ी खूबी से मुझे मेरे अब तक के हर ट्रैवल फ़ैसले पर सवाल उठाने को मजबूर कर रहे थे। उन्होंने मुझे मोरटन आइलैंड के बारे में बताना शुरू किया, जिसका पारंपरिक नाम मुलगुम्पिन है, और टैंगलूमा इसी आइलैंड पर है। यहाँ के समुद्री किनारे एकदम साफ़-सुथरे हैं, पानी इतना नीला है कि यकीन नहीं होता, खाना बेहद लाजवाब है, और इतना काफ़ी नहीं हो, तो हर शाम जंगली बॉटलनोज़ डॉल्फ़िन तैरती हुई किनारे तक आती हैं और आप अपने हाथों से उन्हें खाना खिला सकते हैं। आप डूबे हुए जहाज़ों के आसपास स्नॉर्कलिंग कर सकते हैं, डाइविंग कर सकते हैं, रेत पर एटीवी दौड़ा सकते हैं, डेज़र्ट सफ़ारी पर जा सकते हैं और टोबोगन पर बैठकर रेत के टीलों से नीचे फिसल सकते हैं। कुल मिलाकर, एक पऱफेक्ट हॉलिडे से जो कुछ भी चाहिए होता है, वो सब ब्रिस्बेन से बस खाड़ी के उस पार मौजूद है। ‘और आप ना जाने कितनी बार ऑस्ट्रेलिया आ चुकी हैं, फिर भी यहाँ आने का वक्त आपको अब तक नहीं मिला’, उन्होंने अपनी एक और शिकायत जोड़ते हुए कहा। ‘अरे भई, आप एक महाद्वीप हैं, सिर्फ़ एक देश नहीं!’ मैंने पलटकर जवाब दिया।
यही तो ऑस्ट्रेलिया की सबसे प्यारी मुश्किल है। ये बेहद विशाल है, बेहद रंग-बिरंगा है, और जैसे इसने ठान रखा है कि हर किसी को यहाँ की एक ट्रिप हमेशा कम ही लगेगी। टैंगलूमा जाना मेरा काफ़ी समय से बाकी था; डॉल्फ़िन, माइग्रेट करती व्हेल और एक ऐसे आइलैंड पर एडवेंचर, जिसका 95 प्रतिशत हिस्सा नेशनल पार्क है, ये सब चीजे मुझे ललचाने के लिए काफ़ी थी। उससे भी अच्छी बात ये कि ब्रिस्बेन से फ़ेरी के ज़रिए यहाँ आसानी से पहुँचा जा सकता है। मैंने खुद से वादा किया कि अगली ट्रिप में कोई बहाना नहीं चलेगा और मैं एक बार फिर ऑस्ट्रेलिया का नक्शा देखने लगी।
इतने बड़े देश को कवर करके उसे ठीक से देखा कैसे जाए? सच कहूँ तो नहीं देखा जा सकता। आप एक-दो इलाके चुनते हैं और वापस लौटने की एक वजह बचाकर रखते हैं। और पहला सवाल ये नहीं कि कहाँ, बल्कि ये कि कब।
मेरे लिए इसका जवाब है - अभी, या यूँ कहें कि ऑस्ट्रेलिया का वसंत, यानी सितंबर से नवंबर। जिस वक्त यूरोप और उत्तरी गोलार्ध का बड़ा हिस्सा ठंडे और अंधेरे दिनों की ओर बढ़ रहा होता है, ठीक उसी वक्त ऑस्ट्रेलिया जाग उठता है। यहाँ मौसम उल्टे चलते हैं, हवा में गर्माहट आने लगती है, बगीचे रंगों से भर जाते हैं और भरी गर्मी की तपिश के बिना आउटडोर ज़िंदगी फिर से लौट आती है। कई जगहों पर वसंत शोल्डर सीज़न भी होता है, यानी भीड़ कम और फ़्लाइट व होटल के दाम बेहतर।
कैनबरा में फ़्लोरिएड फ़ेस्टिवल देश की राजधानी को दस लाख से ज़्यादा फूलों से भर देता है। इसे दक्षिणी गोलार्ध का सबसे बड़ा फ़्लॉवर ़फेस्टिवल कहा जाता है। विक्टोरिया में बेंडिगो का सालाना ट्यूलिप डिस्प्ले, वहाँ के हेरिटेज सेंटर को एक फ्री ओपन-एयर शो में बदल देता है, और आसपास का पूरा इलाका अपने ब्लूम फ़ेस्टिवल के ज़रिए वसंत का जश्न मनाता है। पूरे शहर में ट्यूलिप खिलते हैं, लेकिन ये तस्वीर का बस एक हिस्सा है: वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया जंगली फूलों से लहलहा उठता है, सीज़न के आखिर में सिडनी बैंगनी जकरांडा की चादर ओढ़ लेता है, और देशभर के बगीचे जैसे एक-दूसरे से ध्यान खींचने की होड़ में लग जाते हैं।
उष्णकटिबंधीय उत्तर में शुरुआती वसंत का वक्त ड्राय सीज़न से मेल खाता है। और रेड सेंटर को आप गर्मी की कड़ी तपिश शुरू होने से पहले एक्सप्लोर कर सकते हैं। लेयरवाले कपड़े पैक कीजिए, क्योंकि ये कई तरह की आबोहवा वाला महाद्वीप है, लेकिन ऐसे मौसम की उम्मीद रखिए जो आपको बाहर ही रहने को बुलाता रहे, क्योंकि बाहर ही तो ऑस्ट्रेलिया अपना सबसे बड़ा जादू दिखाता है।
ऑस्ट्रेलिया का नाम आते ही शायद ‘सफ़ारी’ शब्द ज़ेहन में सबसे पहले न आए, लेकिन आना चाहिए। एक ही सफ़र में आपको पानी से उछलती व्हेल, शाम ढलते किनारे आती डॉल्फ़िन, खुले मैदानों में छलाँग लगाते कंगारू, यूकेलिप्टस के ऊँचे पेड़ों पर ऊँघते कोआला और समंदर से डगमगाते हुए घर लौटते नन्हे पेंगुइन देखने को और कहाँ मिलेंगे? फ़िलप आइलैंड पर लिटिल पेंगुइन, अपनी मशहूर पेंगुइन परेड पेश करते है।
फिर आता है क्वोका, जिसे उसकी हमेशा बनी रहनेवाली मुस्कान की वजह से दुनिया का सबसे खुश जानवर कहा जाता है। रॉजर ़फेडरर की क्वोका के साथ ली गई मशहूर सेल्फ़ी ने इस छोटे से मार्सुपियल को इंटरनेशनल सेलिब्रिटी बना दिया, लेकिन याद रखिए कि ये एक जंगली जीव है, कोई प्रॉप नहीं। उससे दूरी बनाए रखें।
वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया सिर्फ़ एक छोटे से पड़ाव से कहीं ज़्यादा का हकदार है। सर्वेन्टीज़ के पास सुनहरी रेत से उठते पिनेकल्स चूना-पत्थर की किसी अजीब सी फ़ौज जैसे लगते हैं, और टीलोंवाला ये इलाका रोमांचक ड्राइव और सैंडबोर्डिंग का मौका देता है। हट लैगून का पानी गुलाबी, बैंगनी या लाल रंग में चमक उठता है, क्योंकि नमक पसंद करनेवाला माइक्रो एल्गी ड्यूनालिएला सलीना बीटा-कैरोटीन बनाता है।
और उत्तर की ओर बढ़ें तो ब्रूम एक और भ्रम रचता है: स्टेयरकेस टू द मून। कुछ चुनिंदा रातों में, आमतौर पर मार्च से अक्टूबर के बीच, उगता हुआ पूरा चाँद रोबक बे में ज्वार उतरने के बाद खुले मैदानों पर अपनी परछाईं बिखेरता है, और ऐसा लगता है मानो आसमान तक जाती कोई चमकती सीढ़ी हो। फिर दक्षिण में मार्गरेट रिवर की ओर चलिए, जहाँ वर्ल्ड-क्लास वाइन, ऊँचे जंगल, गुफ़ाएँ, सर्फिंग और लंबे, इत्मीनान भरे लंच आपको अपना स्टे बढ़ाने के लिए मना ही लेते हैं। ऑस्ट्रेलिया में 60 से ज़्यादा वाइन रीजन हैं; सिडनी के पास हंटर वैली और मेलबर्न के पास यारा वैली भी देखने लायक हैं, लेकिन मार्गरेट रिवर में अंगूर के बागानों की नफ़ासत और एकदम जंगली समुद्र तट का अनोखा मेल है।
वहीं क्वींसलैंड हर चीज़ बड़े पैमाने पर सोचता है। ग्रेट बैरियर रीफ़ लगभग 2,300 किलोमीटर तक फैली है और ये धरती का सबसे बड़ा कोरल रीफ़ सिस्टम है, जिसमें हज़ारों अलग-अलग रीफ़ और सैकड़ों आइलैंड व छोटे टापू शामिल हैं। यहाँ स्नॉर्कलिंग या डाइविंग कीजिए और आप कोरल, कछुओं और चमकीली मछलियों की एक जीती-जागती, तैरती दुनिया में पहुँच जाते हैं। अगर आपको तैरना नहीं आता, तो ऑस्ट्रेलिया ने इसका भी इंतज़ाम किया है: ग्लास-बॉटम बोट, सेमी-सबमर्सिबल, पोंटून और सीनिक फ़्लाइट के ज़रिए आप भी इस रीफ़ का नज़ारा ले सकते हैं।
इसी ट्रिप में डेनट्री भी जाइए। यह एक ऐसा रेनफ़ॉरेस्ट है, जिसके विकास का इतिहास करीब 13 करोड़ साल पुराना है। यहाँ प्राचीन हरा-भरा जंगल उष्ण कटिबंधीय समंदर से आकर मिलता है। किसी इंडिजिनस गाइड के साथ पैदल घूमिए, नदी में क्रूज़ कीजिए, कैसोवरी पक्षी को खोजिए या पेड़ों की छतरी के नीचे ज़िपलाइन का मज़ा लीजिए। पास ही कुरांडा तक आप एक खूबसूरत सीनिक रेलवे और स्काईरेल केबल वे से पहुँच सकते हैं। फिर दक्षिण की ओर चलिए और गोल्ड कोस्ट पर सर्फिंग की क्लास लीजिए।
यहाँ के शहर भी कम नशीले नहीं हैं। सिडनी के पास एक ऐसा हार्बर है जो लगभग नाइंसाफ़ी की हद तक खूबसूरत है, जिस पर स्टील का विशाल ब्रिज है और जिसका ताज है ओपेरा हाउस। डेनमार्क के आर्किटेक्ट योर्न उत्ज़ोन ने 1957 में इसका इंटरनेशनल डिज़ाइन कॉम्पिटिशन जीता था। ये इमारत 1973 में खुली और बाद में यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट बनी।
मेलबर्न आपको धीरे-धीरे अपना बनाता है। ये आपको आर्केड, छुपे हुए बार, इंडिपेंडेंट दुकानों और आर्ट से सजी गलियों में खींच ले जाता है। ब्लॉक आर्केड से गुज़रिए, भुनी हुई कॉफ़ी की खुशबू का पीछा कीजिए और मान लीजिए कि यहाँ कॉफ़ी सिर्फ़ एक ड्रिंक नहीं, बल्कि पूरे शहर का जुनून है। मेलबर्न में बिना किसी चेकलिस्ट के घूमने का अपना ही मज़ा है: ब्रेकफ़ास्ट कब ब्रंच बन जाता है, पता नहीं चलता। एक गैलरी दूसरी तक ले जाती है, और डिनर न जाने कैसे किसी ऐसे छोटे से दरवाज़े के पीछे खत्म होता है, जिसे आप लगभग नज़रअंदाज़ कर चुके थे।
कैनबरा सिर्फ़ एक राजनीतिक राजधानी से कहीं बढ़कर है: इसके म्यूज़ियम, गैलरी, झील और डिज़ाइन इसे सिडनी और मेलबर्न के बीच एक सांस्कृतिक पड़ाव बना देते हैं। एडिलेड से बरोसा और मैकलारेन वेल के अंगूर के बागानों का रास्ता खुलता है, फिर भी समुद्री तट, बाज़ार और रेस्टोरेंट यहाँ हाथभर की दूरी पर रहते हैं। ब्रिस्बेन अब गैलरी, मोहल्लों के खाने-पीने के ठिकानोंवाला एक रिवर सिटी बन चुका है, और समंदर में मोरटन आइलैंड इसका इंतज़ार कर रहा है।
ग्रेट ओशन रोड पर चट्टानों और समंदर में खड़े पत्थर के खंभों के पास से ड्राइव कीजिए, किसी महागाथा जैसे सफ़र के लिए नलारबोर पार कीजिए, या कोई कोस्टल रोड पकड़िए और जहाँ भी नज़ारा रुकने को कहे, वहीं रुक जाइए।
अगर आप पहले ऑस्ट्रेलिया जा चुके हैं, तो अपनी सूची में उलुरु और तस्मानिया को भी जोड़ लीजिए। उलुरु सिर्फ़ वो लैंडमार्क नहीं है, जिसे हममें से कई लोग बचपन से एयर्स रॉक के नाम से जानते आए हैं। ये उलुरु-काटा जूटा नेशनल पार्क के पारंपरिक मालिक, अनांगु लोगों के लिए एक पवित्र और जीवंत सांस्कृतिक धरोहर है। किसी अनांगु गाइड के साथ इसके आधार के चारों ओर पैदल घूमिए, जानिए कि जुकुर्पा किस तरह कानून, कहानी, ज़मीन और ज़िम्मेदारी को आपस में जोड़ता है, और देखिए कि रोशनी बदलने के साथ ये बलुआ पत्थर कैसे ज़ंग जैसे रंग से धधकते लाल और फिर गहरे बैंगनी में बदल जाता है। उलुरु के साथ काटा जूटा के गुंबद भी देखिए, शहर की रोशनी से अछूते रात के आसमान को निहारिए, और रेड सेंटर को अपना सेंस ऑफ़ स्केल फिर से तय करने दीजिए।
तस्मानिया इस आइलैंड स्टेट का करीब एक-चौथाई हिस्सा तस्मानियन विल्डरनेस वर्ल्ड हेरिटेज एरिया में आता है, जो 15.8 लाख हेक्टर में फैला ऐसे नज़ारों और जीवों का गढ़ है, जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलते। सेब के बागानों और अंगूर के खेतों के बीच से ड्राइव कीजिए, क्रेडल माउंटेन के नीचे डव लेक के चारों ओर टहलिए, ऊपर से वाइन ग्लास बे के एकदम पऱफेक्ट घुमाव को निहारिए और बे ऑफ़ फ़ायर्स में नीले पानी के सामने नारंगी लाइकेन से ढकी चट्टानों को दहकते देखिए। वॉम्बैट, पैडेमेलन से मिलिए और अगर किस्मत मेहरबान रही तो तस्मानियन डेविल से भी। होबार्ट इसमें बेहतरीन भोजन, सलामांका मार्केट और मोना को जोड़ता है। ये एक ऐसा बेबाक अंडरग्राउंड म्यूज़ियम है, जो साबित करता है कि जंगल और संस्कृति एक ही यादगार सफ़र का हिस्सा बन सकते हैं। सच तो ये है कि ऑस्ट्रेलिया को किसी लिस्ट में टिक करके खत्म नहीं किया जा सकता। हर बार जाने पर एक नया ऑस्ट्रेलिया सामने आता है। तो मुझे टैंगलूमा बुलाने के लिए चैड को क्या करना होगा? लगता है, बस फ़ोन करके ये याद दिलाना, कि मैं क्या-क्या मिस कर रही हूँ।
और जहाँ तक आपकी बात है, आप ये इंतज़ार करना छोड़ दीजिए कि ऑस्ट्रेलिया कभी इतना छोटा हो जाएगा कि एक ही छुट्टी में पूरा देखा जा सके। ऐसा कभी नहीं होगा। अभी जाइए, जब वसंत शहरों में फूल, कोस्ट पर सुहाने दिन और नज़ारों में नई जान भर रहा है। अपना पहला अध्याय चुनिए - ब्रिस्बेन और मोरटन आइलैंड, पर्थ और पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया, केर्न्स और रीफ़, सिडनी और मेलबर्न - और अगर इन जगहों पर पहले जा चुके हैं तो फिर अपनी सूची में उलुरु या तस्मानिया को जोड़ लीजिए। अच्छी प्लानिंग कीजिए, जितना ज़रूरी लगे उससे ज़्यादा दिन रुकिए, और कुछ अगली बार के लिए भी छोड़ दीजिए। ऑस्ट्रेलिया सिर्फ़ एक देश नहीं है। ये एक महाद्वीप है, कई दुनियाओं का संगम है, और एक बार आपके ज़ेहन में बस जाए तो ये एक ऐसी बातचीत बन जाता है, जो कभी पूरी तरह खत्म नहीं होती।














































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