Published in Navbharat Times 27th September 2026
कुदरत ने अपने हाथों से तराशे दो बेमिसाल देश!
अपसाइड डाउन
एक बार मैं दुनिया के ऩक्शे के सामने खड़ी थी। ऩक्शा जाना-पहचाना लग रहा था, फिर भी कुछ अलग-सा महसूस हो रहा था और तभी मेरा ध्यान गया कि मैं दुनिया का ऩक्शा उल्टा देख रही थी। उसमें सदर्न हेमिस्फियर ऊपर और नॉर्दर्न हेमिस्फियर नीचे की तरफ़ था।
मैं ऐलिस स्प्रिंग्स के ‘स्कूल ऑफ़ द एयर’ में थी। आयर्स रॉक से यह स्कूल बहुत दूर नहीं है। यहाँ के शिक्षक सिर्फ़ आवाज़ के ज़रिए ऑस्ट्रेलिया के विस्तृत, दुर्गम आउटबैक में रहने वाले बच्चों तक पहुँचते हैं। कभी-कभी तो वे हज़ारों किलोमीटर की दूरी भी पार करके आते हैं। और वहाँ की दीवार पर यही ऩक्शा टँगा था। उस उल्टे ऩक्शे ने मुझे बहुत कुछ सोचने पर मजबूर कर दिया। उसने मुझे शांति से सोचने के लिए प्रेरित किया। मन में आया कि हम दुनिया का ऩक्शा जिस तरह देखते हैं, वह कोई प्रकृति की तय की हुई दिशा नहीं है। वह ऐसा इसलिए दिखता है, क्योंकि यूरोपीय यात्रियों और मानचित्रकारों ने उसे उसी तरह से तैयार किया था। और मानचित्रकारों ने जिस तरह से दुनिया का खाका खींचा, हमने भी वही तरीक़ा अपना लिया। इसलिए ऑस्ट्रेलिया नीचे है, बस इतनी-सी बात है! भूगोल का ऐसा कोई नियम नहीं है कि ऑस्ट्रेलिया हमेशा दुनिया के ऩक्शे के सबसे नीचे ही रहना चाहिए। वह ऊपर भी हो सकता है! और सच कहूँ तो, प्राकृतिक सुंदरता के लिहाज़ से देखें, तो ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड को दुनिया के सबसे ऊपरी स्थान पर होना चाहिए।
इन देशों में सब कुछ थोड़ी अलग ही लय में चलता है और वह भी बेहद सुखद अंदाज़ में! यहाँ के मौसम भी उलटे होते हैं। यानी जब नॉर्दर्न हेमिस्फियर में दिसंबर की कड़ाके की सर्दी पड़ रही होती है, तब ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड में बसंत और गर्मी की दस्तक हो रही होती है। धूप, नीला आसमान और छुट्टियों के लिए एकदम मु़फीद मौसम! ऑस्ट्रेलिया का समुद्रतट हर कुछ सौ किलोमीटर पर अपना रंग-रूप बदल लेता है। ऑस्ट्रेलिया के शहर जोशीले, जीवंत और रहने लायक़ बेहतरीन जगहें हैं। और यहाँ का वन्यजीवन? वह तो दुनिया में कहीं और है ही नहीं। लाल मिट्टी पर उछलते-कूदते कंगारू, नीलगिरी के पेड़ों पर सुस्ताते कोआला - इस तरह के नज़ारे ऑस्ट्रेलिया के अलावा और कहाँ देखने को मिलेंगे? और ऑस्ट्रेलिया की मूल निवासी (ऐबोरिजिनल) संस्कृति का इस धरती, प्रकृति और आसमान से बहुत पुराना नाता है।
टास्मान सागर पार करके न्यूज़ीलैंड पहुँचते ही पूरी कहानी बदल जाती है। यहाँ सदर्न एल्प्स की पर्वतमाला मानो अविश्वसनीय नीली झीलों से अचानक उभर आती है। बर्फ़ से ढके ग्लेशियरों की धार हरे-भरे रेऩफॉरेस्ट की ओर बहती चली आती है। यहाँ की रोशनी भी इतनी साफ़ और पारदर्शी होती है, कि ऐसी चमक दुनिया में बहुत कम जगहों पर महसूस होती है।
कभी-कभी किसी जगह को नई नज़र से देखने के लिए दुनिया का ऩक्शा ही उलटा करना पड़ता है। ऑस्ट्रेलिया और न्यूज़ीलैंड दुनिया के ऩक्शे पर कहाँ हैं, इससे ज़्यादा ज़रूरी यह है कि वे आपके यात्रा-ऩक्शे पर कहाँ हैं! क्योंकि दुनिया के सबसे नीचे बसे ये दोनों देश आपकी बकेट लिस्ट में सबसे ऊपर भी हो सकते हैं। तो चलिए, दुनिया को एक अलग नज़रिए से... अपसाइड डाउन देखते हैं!
दो देश... दो संस्कृतियाँ...
ऑस्ट्रेलिया - न्यूज़ीलैंड यानी हर किसी की बकेट लिस्ट में शामिल, दुनिया के छोर पर बसे दो ख़ूबसूरत देश! ऑस्ट्रेलिया की कहानी शुरू होती है पूरे 65,000 साल पहले। तब से आज तक ऐबोरिजिनल और टोरेस स्ट्रेट आइलैंडर लोगों की संस्कृति जीवंत है। उनकी ड्रीमटाइम की कहानियाँ, धरती से जुड़ाव, चित्रकला, संगीत, नृत्य और पारंपरिक समारोह ऑस्ट्रेलिया की पहचान का अभिन्न हिस्सा हैं।
वहीं दूसरी ओर न्यूज़ीलैंड यानी स्थानीय माओरी भाषा में आओटेरोआ। लगभग सनथ 1250 के आसपास पॉलिनेशियन समुद्री यात्रियों द्वारा खोजी गई यह जगह द्वीपों का एक समूह है। माओरी लोगों ने न्यूज़ीलैंड को ‘लैंड ऑफ़ द लॉन्ग व्हाइट क्लाउड’ नाम दिया। महान पॉलिनेशियन खोजकर्ता कुपे की कहानियाँ, पहाड़ों, नदियों, समुद्र और प्रकृति से जुड़ी माओरी लोककथाएँ यहाँ के जीवन का हिस्सा हैं। माओरी संस्कृति आज भी भाषा, संगीत, परंपरा और राष्ट्रीय गौरव के ज़रिए जीवंत नज़र आती है। हाका जैसे पारंपरिक नृत्य से लेकर रग्बी मैदान पर खेलने वाली ऑल ब्लैक्स टीम तक, हमें माओरी संस्कृति की झलक हर जगह मिलती है।
भूगोल के लिहाज़ से दोनों देश मानो प्रकृति का भव्य उत्सव ही हैं! ऑस्ट्रेलिया दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है, जो ख़ुद एक महाद्वीप भी है। यहाँ ग्रेट बैरियर रीफ़, प्राचीन रेनफ़ॉरेस्ट, अंतहीन समुद्रतट और लाल रेगिस्तान में बसा उलुरू है। वहीं न्यूज़ीलैंड में ज्वालामुखी, गर्म झरने, जियोथर्मल घाटियाँ, ग्लेशियर और मिलफ़ोर्ड साउंड जैसी समुद्र द्वारा तराशी गई घाटियाँ एक ही यात्रा में देखने को मिलती हैं। टास्मान सागर इन दोनों देशों को अलग करता है, लेकिन यात्रा के ऩक्शे पर ये दोनों देश एक अद्भुत कहानी के दो अध्याय जैसे लगते हैं।
यहाँ प्रकृति हमारा जितना दिल जीतती है, उतना ही दिल जीतता है यहाँ का खाना! हर स्वाद के पीछे प्रकृति, परंपरा और प्रवासी संस्कृतियों की कहानी छिपी है। लेकिन इन दोनों देशों का योगदान सिर्फ़ प्रकृति और खान-पान तक सीमित नहीं है। न्यूज़ीलैंड ने दुनिया को वाई-फ़ाई तकनीक से लेकर विमान के ब्लैक बॉक्स तक, कई चीज़ें दी हैं, जो आज हमारी रोज़मर्रा की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुकी हैं।
इन देशों का उत्सवों का कैलेंडर भी उतना ही रंगीन है। सिडनी का विविड सिडनी फ़ेस्टिवल रोशनी, संगीत और रचनात्मकता का उत्सव है। नवंबर में होनेवाला मेलबर्न कप पूरे ऑस्ट्रेलिया का ध्यान खींचता है, तो न्यूज़ीलैंड में मातारिकी, यानी माओरी नववर्ष, राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश के रूप में मनाया जाता है। जब आसमान में मातारिकी तारामंडल दिखने लगता है, तो बीते साल को याद किया जाता है, वर्तमान का आनंद लिया जाता है और नए साल की आशा जताई जाती है।
और फिर आती है क्रिकेट की बात! भारत और ऑस्ट्रेलिया के लिए क्रिकेट सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि भावनाओं का विषय है। बॉर्डर-गावस्कर ट्रॉफ़ी से लेकर विश्व कप तक, स्टीव वॉ, रिकी पॉन्टिंग, शेन वॉर्न से लेकर पैट कमिंस, मिचेल स्टार्क और ट्रैविस हेड तक... ऑस्ट्रेलियाई क्रिकेट की कई पीढ़ियाँ भारतीय क्रिकेट-प्रेमियों की यादों का हिस्सा हैं।
सचिन तेंदुलकर के ऑस्ट्रेलिया में बनाए शतक, वी. वी. एस. लक्ष्मण की ऐतिहासिक पारी, अजिंक्य रहाणे की कप्तानी में भारत की 2020-21 की यादगार सीरीज़ जीत - ये यादें क्रिकेट से आगे जाकर दोनों देशों के प्रशंसकों के दिलों में बस गई हैं। इंडियन प्रीमियर लीग ने इस रिश्ते को और मज़बूत कर दिया है। भारतीय और ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ी साथ खेलते हैं और करोड़ों प्रशंसक इस खेल का आनंद उठाते हैं।
वहीं दूसरी ओर क्रिकेट के मैदान पर न्यूज़ीलैंड के साथ भिड़ते हुए हमने कई बार जश्न मनाया है। इस साल भारत का न्यूज़ीलैंड दौरा 22 अक्टूबर से 1 दिसंबर 2026 के बीच होने वाला है, जिसमें पाँच टी 20, पाँच ODI और दो टेस्ट मिलाकर कुल 12 मैच खेले जाएँगे। यह न्यूज़ीलैंड क्रिकेट के इतिहास का सबसे बड़ा इनबाउंड बाय-लैटरल दौरा साबित होगा।
तो ऐसे हैं ये ऑस्ट्रेलिया - न्यूज़ीलैंड, जो सिर्फ़ घूमने की जगहें नहीं, बल्कि दो देशों, दो संस्कृतियों और उम्र भर संजोकर रखी जाने वाली अनगिनत यादों का अनुभव हैं!
अरे वाह! ये तो मुझे बिल्कुल पता ही नहीं था!
- ऑस्ट्रेलिया दुनिया का इकलौता ऐसा देश है, जो ख़ुद एक महाद्वीप भी है। यह देश तीन महासागरों से घिरा हुआ है।
- ग्रेट बैरियर रीफ़ धरती पर सबसे बड़ी सजीव संरचना है। यहाँ 9,000 से ज़्यादा प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- वाइतोमो ग्लोवर्म केव्स में ऐराक्नोकैम्पा ल्यूमिनोसा नाम के जुगनुओं की ऐसी प्रजाति पाई जाती है, जो दुनिया में और कहीं नहीं मिलती। उनके चमकते धागों से गुफा की छत मानो जीवंत तारों भरे आसमान जैसी दिखने लगती है।
- ऑस्ट्रेलिया की ऐबोरिजिनल संस्कृति दुनिया की सबसे प्राचीन संस्कृति मानी जाती है - यह मिस्र के पिरामिडों से भी हज़ारों साल पुरानी है।
- न्यूज़ीलैंड में लगभग सन 1250 तक कोई मानव बस्ती नहीं थी। इसे मनुष्य द्वारा बसाया गया आख़िरी बड़ा भूभाग माना जाता है।
- विश्वप्रसिद्ध ‘द लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स’ और ‘द हॉबिट’ फ़िल्मों की वजह से न्यूज़ीलैंड को ‘मिडल अर्थ’ कहा जाता है।
- न्यूज़ीलैंड का क्वीन्सटाउन शहर दुनिया की ‘एडवेंचर कैपिटल’ के नाम से जाना जाता है।
- लोकप्रिय साहसिक खेल ‘बंजी जंपिंग’ की व्यावसायिक शुरुआत दुनिया में सबसे पहले न्यूज़ीलैंड में ही हुई।
- न्यूज़ीलैंड में दुनिया में सबसे पहले 1893 में महिलाओं को मतदान का अधिकार मिला।
- न्यूज़ीलैंड का ‘किया पक्षी’ दुनिया का इकलौता ‘एल्पाइन पैरट’ है, जो गाड़ियों के पुर्ज़े नोचने के लिए मशहूर है।
- न्यूज़ीलैंड में क्रिसमस गर्मियों में मनाया जाता है।
वीणा वर्ल्ड वूमन्स स्पेशल
खुशियों का नया रंग, उत्साह की नई वजह!
वीणा वर्ल्ड की 9 दिनों के वूमन्स स्पेशल ऑस्ट्रेलिया टूर में अनुभव कीजिए सिडनी क्रिकेट ग्राउंड, सिडनी ऑपेरा हाउस और सिडनी हार्बर क्रूज़! कुरांडा रेनफ़ॉरेस्ट की हरियाली, गोल्ड कोस्ट के ख़ूबसूरत समुद्रतट, ग्रेट बैरियर रीफ़ की अद्भुत समुद्री दुनिया, फ़िलिप आइलैंड पर पेंग्विन परेड, ग्रेट ओशन रोड का सुरम्य सफ़र और हेलिकॉप्टर राइड का रोमांच! ऑस्ट्रेलिया के इन ख़ास आकर्षणों का अनुभव लेते हुए सहेलियों के साथ गप्पें, ठहाके और नई-नई यादों का साथ भी मिलेगा। इसके अलावा सफ़र में आपकी पसंद-नापसंद का ख़याल रखने वाला टूर मैनेजर भी साथ है। इसलिए आप हर पल का भरपूर आनंद उठा पाएँगी। यह सिर्फ़ ऑस्ट्रेलिया देखने वाला टूर नहीं, बल्कि यह है ख़ुद के लिए समय निकालने, नई सहेलियाँ बनाने, नए अनुभव जीने और ख़ुद को फिर से एक बार यह बताने का मौक़ा कि मैं अभी भी बहुत कुछ कर सकती हूँ!
एक सफ़र, जो सब कुछ बदल देता है!
ऑस्ट्रेलिया की यात्रा शुरू होते ही सिडनी का ऑपेरा हाउस नज़र में भर जाता है। यह मानो कला की मूर्ति ही है! आगे ग्रेट ओशन रोड का घुमावदार सफ़र, हर मोड़ पर रुककर देखने का मन करनेवाला समुद्र का रूप और सामने खड़े ट्वेल्व एपॉसल्स हमें चकित कर देते हैं। पूरे 2,300 किलोमीटर तक फैली ग्रेट बैरियर रीफ़ अपनी विशालता से हमें अचंभित कर देती है। इसका अस्तित्व अंतरिक्ष से भी महसूस होता है। मेलबर्न अपनी कलात्मक गलियों, छोटे-छोटे कफ़े और अपनेपन के माहौल की वजह से कुछ ही देर में अपना-सा लगने लगता है। हालाँकि न्यूज़ीलैंड में प्रकृति का मिजाज़ कुछ बदल जाता है। मिलफ़ोर्ड साउंड की बादलों को छूती ऊँची-ऊँची चट्टानें और उनसे धीरे-धीरे उभरता प्रकृति का बेजोड़ रूप हमारी नज़रों के सामने आता है। अँधेरे में तारों की तरह चमकते ‘वाइतोमो ग्लोवर्म केव्स’ देखे जा सकते हैं और क्वीन्सटाउन में जेट बोटिंग, गोंडोला राइड और विश्वप्रसिद्ध वाइन का आनंद एक ही दोपहर में लिया जा सकता है। और इन सबको सार्थक बनाती है वहाँ की माओरी संस्कृति।
ज़िंदगी में एक बार तो...यह करना है!
- सूर्यास्त के समय सिडनी हार्बर ब्रिज से ऑपेरा हाउस देखना है।
- ग्रेट बैरियर रीफ़ में स्नॉर्केलिंग करके ब्लू प्लैनेट के सच्चे अर्थ का अनुभव करना है।
- ग्रेट ओशन रोड पर ड्राइव करते हुए, लहरों के समक्ष ट्वेल्व एपॉसल्स केपास रुककर वहाँ का ख़ूबसूरत नज़ारा देखना है।
- सूरज ढलते समय फ़िलिप आइलैंड पर हज़ारों पेंग्विन को किनारे लौटते देखना है।
- वाइतोमो ग्लोवर्म केव्स में, नीले तारों से भरे आसमान का अनुभव लेना है।
- हॉबिटन फ़िल्म सेट पर जाना है।
- सुबह की धुंध में मिलफ़ोर्ड साउंड की सैर करते हुए झरनों की गूँज कोकानों में बसा लेना है।
- ‘ते पुइया’ में माओरी प्रस्तुति देखनी है।
हॉलीवुड बॉलीवुड
कुछ जगहें हम पहली बार देखते हैं, लेकिन वे अनजानी लगती ही नहीं, क्योंकि पर्दे पर वे हमसे पहले ही मिल चुकी होती हैं।
‘दिल चाहता है’ ने ऑस्ट्रेलिया को भारतीय सिनेमा के ऩक्शे पर एक ख़ास जगह दिलाई है। ‘जाने क्यों’ गाने में सिडनी ऑपेरा हाउस और हार्बर ब्रिज देखकर कई भारतीयों को ऑस्ट्रेलिया से प्यार हो गया था। इसके बाद पूरी तरह ऑस्ट्रेलिया में फ़िल्माई गई पहली भारतीय फ़िल्म ‘सलाम नमस्ते’ ने मेलबर्न और ग्रेट ओशन रोड से लाखों दर्शकों को रूबरू कराया। ‘चक दे इंडिया’ और ‘बचना ऐ हसीनों’ फ़िल्मों ने सिडनी की यादों को भावनात्मक रंग दिया। पर्दे पर दिखाई गई ये जगहें फिर सिर्फ़ पर्यटन स्थल नहीं रहीं, बल्कि सिनेमा की यादों का हिस्सा बन गईं।
वहीं दूसरी ओर ‘कहो ना प्यार है’ ने न्यूज़ीलैंड के क्वीन्सटाउन की सुरम्य सुंदरता को भारत के घर-घर तक पहुँचा दिया था। इसके बाद ‘द लॉर्ड ऑफ़ द रिंग्स’ ने तो पूरे न्यूज़ीलैंड को ही एक भव्य फ़िल्मी पर्दे पर ला दिया था। इन दोनों ही देशों में दुनिया भर के दर्शकों ने अपनी-अपनी पसंदीदा कहानियों को जिया है। इसलिए इन जगहों पर ख़ुद खड़े होने पर महसूस होता है कि भले ही हम यहाँ पहली बार आए हों, फ़िर भी हमारा मन यहाँ पहले भी कई बार पहुँच चुका है!
स्वाद का सफ़र
सिडनी हार्बर के किनारे सुनहरी रोशनी में नहाया ऑपेरा हाउस और सामने ताज़ा सी ़फूड... ऑस्ट्रेलिया का इससे बेहतर स्वाद और कहाँ मिलेगा? मेलबर्न यानी दुनिया को असली ‘फ़्लैट व्हाइट कॉफ़ी’ का स्वाद सिखाने वाला शहर। एमसीजी का ‘मीट पाई’ और क्वीन्सलैंड का ‘ग्रिल्ड बारामुंडी’ खाते हुए हर निवाले की अपनी एक कहानी लगती है।
न्यूज़ीलैंड में मार्लबरो की ‘सॉविन्यों ब्लां’ चखने के लिए किया गया सफ़र भी सार्थक लगता है। भव्य सदर्न एल्प्स की पृष्ठभूमि में वाइनरी में इत्मीनान से लिया गया भोजन मन को तृप्त कर देता है।
पावलोवा का जन्म ऑस्ट्रेलिया में हुआ या न्यूज़ीलैंड में, इस पर बहस कभी ख़त्म नहीं होगी। वहीं माओरी हांगी यानी ज़मीन के भीतर बने चूल्हे में पकाया गया पारंपरिक भोजन, हज़ारों साल पुरानी संस्कृति से जोड़ने वाला अनुभव है। तो बताइए, इनमें से किसका स्वाद चखना है आपको? आप इनमें से पहले किसे अनुभव करना पसंद करेंगे?
‘लैंड डाउन अंडर’ देखिए वीणा वर्ल्ड के साथ!
कस्टमाइज़्ड हॉलिडेज़: आपके सपनों का न्यूज़ीलैंड और ऑस्ट्रेलिया का सफ़र अब बिल्कुल आपकी मर्ज़ी के मुताबिक़ बनाने के लिए वीणा वर्ल्ड लेकर आया है कस्टमाइज़्ड हॉलिडेज़! न्यूज़ीलैंड के साउथ आइलैंड में सेल्फ़-ड्राइव या प्राइवेट शॉफ़र ड्राइव, लक्ज़री विल्डरनेस लॉज, ट्रांस अल्पाइन सीनिक ट्रेन, फ़्रांज़ जोसेफ़ का ग्लेशियर हेली-लैंडिंग, रोटोरुआ के जियोथर्मल हॉट बाथ और माओरी कल्चरल इवनिंग, मिलफ़ोर्ड साउंड क्रूज़, सनराइज़ हॉट एयर बलून स़फारी, मार्लबरो में वाइन टेस्टिंग और लेक टेकापो की एल्पाइन सुंदरता, क्वीन्सटाउन की रोमांचक दुनिया, और हॉबिटन मूवी सेट का जादू... इनमें से क्या अनुभव करना है, यह आप तय करें! ऑस्ट्रेलिया में ग्रेट बैरियर रीफ़ पर हेलिकॉप्टर या सी प्लेन फ़्लाइट, व्हिटसंडेज़ में व्हाइटहेवन बीच और प्राइवेट याट अनुभव, निंगलू रीफ़ में व्हेल शार्क के साथ तैरने का रोमांच, तो उलुरू में सनसेट और फ़ील्ड ऑफ़ लाइट, मार्गरेट रिवर या बारोसा वैली की ख़ास वाइन एक्सपीरियंस, ग्रेट ओशन रोड का सेल्फ़-ड्राइव या सिडनी हार्बर पर डिनर क्रूज़... हर अनुभव आपकी पसंद के मुताबिक़! तो बताइए, आपको कहाँ जाना है।
माइस एंड कॉर्पोरेट ग्रुप्स: सिडनी के ऑपेरा हाउस की पृष्ठभूमि में आयोजित लीडरशिप मीट, शहर की रोशनी देखने के लिए 200 प्रतिनिधियों की हार्बर क्रूज़... ख़ास आपके डेलिगेशन के लिए आयोजित माओरी कल्चरल इवनिंग। ऐसे कई अनुभवों से समृद्ध माइस टूर अधिकारियों के लिए सुनहरा मौक़ा हैं। अब तक वीणा वर्ल्ड ने 350 से ज़्यादा कंपनियों के 20 से 2,000 प्रतिनिधियों तक के समूहों का प्रबंधन सफलतापूर्वक किया है। तो हर छोटे-बड़े ब्योरे की ज़िम्मेदारी वीणा वर्ल्ड की रहेगी और हर ख़ूबसूरत याद आपके खाते में होगी! और क्या चाहिए?
ग्रुप टूर्स: आपके पास चाहे 7 दिन हों या 21, वीणा वर्ल्ड की ऑस्ट्रेलिया-न्यूज़ीलैंड ग्रुप टूर्स को इस तरह से तैयार किया गया है, कि इन अनोखे देशों का अनुभव आप जितना गहराई से चाहें, उतनी गहराई ले सकें। इन टूर्स पर पहले दिन से ही आपके साथ टूर मैनेजर मौजूद रहते हैं। इसके अलावा भारतीय भोजन की व्यवस्था, वीज़ा संबंधी मार्गदर्शन और भारत के अलग-अलग शहरों से प्रस्थान करने की सुविधा भी है। ऑल-इनक्लूसिव, ऑल-मैनेज्ड और इसीलिए एक्स्ट्रा-ऑर्डिनरी!
तो चलिए वीणा वर्ल्ड के साथ। क्योंकि सफ़र सिर्फ़ आपकी देखी हुई जगहें भर नहीं होते, बल्कि उन जगहों के बीच आप ख़ुद में जो बदलाव महसूस करते हैं, वह भी होते हैं।
यादें बनाने वाला आपका सहयात्री - वीणा वर्ल्ड टूर मैनेजर
‘पेंग्विन परेड’ का अनुभव लेना हो, तो भीड़ से पहले पहुँचना कितना ज़रूरी होता है, यह मुझे पता है। ‘ट्वेल्व एपॉसल्स’ के ऊपर से हेलिकॉप्टर राइड करें, तो उसका हर पल सार्थक लगता है, यह भी मुझे मालूम है और ‘ते पुइया’ में पारंपरिक माओरी पऱफॉर्मेंस को बिल्कुल सामने से देखने का मज़ा भी कुछ और ही होता है, यह भी मैंने अनुभव किया है! आपके लिए भारतीय भोजन का ख़याल रखना हो, या वीज़ा सपोर्ट, हम आपका ऑस्ट्रेलिया - न्यूज़ीलैंड का स़फर कुछ इस तरह से तैयार करते हैं, कि आप जहाँ भी पहुँचें, वहाँ जोश और उत्साह से भरे रहें। इसीलिए वीणा वर्ल्ड के साथ सफ़र करते हुए आप सिर्फ़ एक ही चीज़ साथ लेकर निकलते हैं, और वह है घूमने की और उम्र भर याद रहने वाली यादों की उत्सुकता! ऑस्ट्रेलिया से न्यूज़ीलैंड तक, स़फर के हर क़दम पर आपके साथ, ‘मैं हूँ ना!’













































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