Published in Navbharat Times 11th October 2026
ऑटम फॉलिएज
हाल ही में मुझे भारत की कुछ प्रमुख टूर कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ न्यू साउथ वेल्स और ऑस्ट्रेलिया के कुछ मंत्रियों की हुई एक मीटिंग अटेंड करने का मौका मिला। पर्यटन पर चर्चा के दौरान उन्होंने हमसे एक सवाल पूछा, “आज भारतीय पर्यटकों में किस इंटरनेशनल डेस्टिनेशन को लेकर ज़बरदस्त उत्सुकता और आकर्षण देखने को मिल रहा है?” इस पर मीटिंग में मौजूद सबका जवाब एक ही था, जापान! और सच कहूँ तो मुझे लगता है कि भारतीय पर्यटकों को जापान पसंद आना बिल्कुल स्वाभाविक है। क्योंकि यह एक ऐसा डेस्टिनेशन है, जो हर उम्र के पर्यटकों को अपना बना लेता है। यहाँ का खान-पान, पॉप कल्चर, सदियों पुरानी परंपराएँ, आधुनिक टेक्नोलॉजी में बेमिसाल तरक्की, कुदरती खूबसूरती और जापानी जीवनशैली का अनूठापन... ये सारी बातें मन मोह लेती हैं। लेकिन जापान की जो यादें मेरे ज़ेहन में हमेशा के लिए बस गई हैं, वे वहाँ के लोगों की हैं! क्योंकि सफ़र हमें वहाँ के लोगों से एक अलग ही रिश्ते में जोड़ देता है। कोई किताब, फ़िल्म या इंस्टाग्राम रील हमें किसी जगह के बारे में उतना नहीं बता पाती, जितना किसी इंसान से हुई एक छोटी-सी मुलाकात बता जाती है। जापान का एक अनुभव बताऊँ तो एक बार मैंने रास्ता पूछने के लिए वहाँ की एक महिला को रोका। तब उन्होंने सिर्फ़ रास्ता बताने के बजाय मेरे साथ चलना शुरू कर दिया। जब तक उन्हें यकीन नहीं हो गया कि मैं सही दिशा में जा रही हूँ, तब तक वे मेरे साथ चलती रहीं। उनके लिए शायद यह एक छोटी-सी बात रही होगी, लेकिन मेरे मन पर वह वाकया हमेशा के लिए छप गया।
इससे पहले मैं जापान सर्दियों में गई थी। बरसों से हम भारतीय लोग जापान को, खासकर वसंत ऋतु में खिलनेवाले मशहूर चेरी ब्लॉसम्स से जोड़ते आए हैं। लेकिन आज जापान सालभर पर्यटकों को लुभानेवाला डेस्टिनेशन बन चुका है और उसमें भी ऑटम को, जापान का अनुभव लेने के लिए सबसे खूबसूरत सीज़न माना जाने लगा है। सितंबर के आखिर में जापान में ऑटम की आहट सुनाई देने लगती है। उत्तर के ठंडे इलाकों से शुरू होकर रंगों का यह सफ़र धीरे-धीरे दक्षिण की ओर बढ़ता जाता है। तापमान घटने पर पेड़ों की पत्तियों में क्लोरो़िफल की मात्रा कम हो जाती है और पत्तियों में छिपे दूसरे रंग धीरे-धीरे उभरने लगते हैं। हरी-भरी पत्तियाँ पीले, नारंगी, गहरे लाल और ताँबे जैसे भूरे रंगों की मनमोहक छटाओं में बदल जाती हैं। मानो कुदरत अपनी कूची से खुले हाथों, रंग बिखेरने लगती है। जापानी भाषा में ऑटम सीज़न में रंग बदलने वाली पत्तियों को ‘कोयो’ कहते हैं, और ‘मोमिजीगारी’ का मतलब है ऑटम सीज़न की रंग-बिरंगी पत्तियों की तलाश में कुदरत के बीच घूमना। यह अनुभव सिर्फ़ खूबसूरत पेड़ों की तस्वीरें खींचने तक सीमित नहीं है। पलभर ठहरकर, कुदरत की, दिल खोलकर लुटाई गई खूबसूरती का, तहेदिल से लुत्फ़ उठाना, इसमें एक अलग ही जापानी संवेदनशीलता है। क्षणभंगुर सौंदर्य को महसूस करने का यह नज़रिया, उनके जीवन-दर्शन से भी जुड़ा हुआ है।
क्योटो के प्राचीन मंदिरों की पृष्ठभूमि में सुर्ख लाल मेपल के पेड़, सुनहरी पत्तियों से ढके पहाड़ी रास्ते, दोपहर की गुनगुनी धूप में दमकते ट्रेडिशनल गार्डनों और पैदल घूमने के लिए बिल्कुल सही खुशनुमा दिन... ये हमें जापान के एक अलग ही रूप से रूबरू कराते हैं, जो कहीं ज़्यादा शांत, समृद्ध, रंगों से सजा हुआ और दिल को गहराई तक छू जाने वाला है। तो इस बार आप भी चलिए, ऑटम सीज़न का रंग-बिरंगा जापान देखने!
अ रियल मेकओवर!
जापान में ऑटम की आहट होते ही मानो कुदरत धीरे-धीरे अपना रंगमंच सजाने लगती है। हरी-भरी पत्तियाँ पहले पीली होती हैं। फिर नारंगी, लाल और ताँबे जैसी छटाओं से पेड़ दमक उठते हैं। पहाड़, रास्ते, बाग-बगीचे, मंदिर परिसर और झीलों के किनारे, हर तरफ़ रंगों की ऐसी बौछार होने लगती है कि कुछ पल हम बस देखते ही रह जाते हैं। क्योटो में इन रंगों का जादू और भी निखर उठता है। पुराने मंदिरों की पारंपरिक इमारतें, पत्थर की पगडंडियाँ और उनके आसपास के लाल-नारंगी पेड़, यह नज़ारा इतना खूबसूरत लगता है मानो हम किसी पुरानी जापानी पेंटिंग के भीतर चल रहे हों। कियोमिज़ु-देरा या तोफुकु-जी जैसे मंदिरों में ऑटम के दिनों में कुदरत और वास्तुकला का अद्भुत रिश्ता महसूस होता है। अराशियामा इलाके में हरे-भरे बाँस के जंगल से आगे बढ़ते हुए अचानक नज़र आनेवाली रंगों की यह बौछार देखना तो आँखों के लिए दावत ही है।
जापानी संस्कृति में ऋतु-परिवर्तन का खास महत्व है। ‘मोनो नो अवेअर’ नाम की जापानी अवधारणा सौंदर्य की क्षणभंगुरता का एहसास कराती है। कोई भी खूबसूरत चीज़ हमेशा नहीं रहती, इसीलिए उसके हर पल को, और भी दिल से जीना चाहिए, यही यह फ़िलॉसफ़ी सिखाती है। इसीलिए जापानी लोग पत्तियों के बदलते रंगों को इतनी बारीकी और उत्सुकता से निहारते हैं।
इस मौसम का असर जापान की खान-पान संस्कृति में भी नज़र आता है। शकरकंद, चेस्टनट, सीज़नल स्वीट्स, माचा से बने व्यंजन और गरमागरम रामेन का स्वाद, ठंडी हवा में और भी निखर उठता है। जापान में ऑटम सिर्फ़ देखने का मौसम नहीं, बल्कि इसे खाने-पीने, घूमने-फिरने और जीने में भी महसूस किया जा सकता है। इसलिए जापान का ऑटम देखने के लिए बहुत कुछ करने की ज़रूरत नहीं होती। किसी मंदिर की सीढ़ियों पर कुछ पल चुपचाप बैठना, ट्रेन की खिड़की से तेज़ी से पीछे छूटती रंग-बिरंगी कुदरत को निहारना, हाथ में गरम चाय का कप लेकर फ़ॉल को महसूस करना या किसी सुकून भरी सड़क पर बस चलते रहना... ऐसे छोटे-छोटे पल ही, सफ़र की बड़ी यादें बन जाते हैं। जापान का ऑटम सीज़न यानी कुदरत की बनाई एक ऐसी तस्वीर, जो हर पल बदलती रहती है। और इसीलिए इसे एक बार देखकर मन नहीं भरता, बल्कि बार-बार देखने को जी चाहता है।
अरे वाह!
ये तो मुझे बिल्कुल पता ही नहीं था!
- जापान में ऑटम लीव्ज़ देखने की परंपरा ‘मोमिजीगारी’ कहलाती है। इसका मतलब है ‘रंग-बिरंगी पत्तियों की तलाश’।
- चेरी ब्लॉसम की तरह ऑटम कलर्स का भी राष्ट्रीय स्तर पर फ़ोरकास्ट जारी किया जाता है।
- जापान में मेपल के पेड़ों की हज़ारों किस्में पाई जाती हैं और इन्हीं की बदौलत देश भर में अलग-अलग रंगतें देखने को मिलती हैं।
- जापान में मेपल के पेड़ों की 26,000 से ज़्यादा प्रजातियाँ पाई जाती हैं।
- क्योटो में 1,600 से ज़्यादा बौद्ध मंदिर और 400 से ज़्यादा शिंतो श्राइन्स हैं।
- गिंको पेड़ों की सुनहरी पत्तियाँ जापानी ऑटम सीज़न की खास पहचान मानी जाती हैं।
- निक्को, जापान के सबसे लोकप्रिय ऑटम डेस्टिनेशन्स में से एक है, जहाँ पहाड़ों, झरनों और मंदिरों का खूबसूरत संगम दिखता है।
- माउंट फ़ुजी के आसपास का ‘फ़ाइव लेक्स’ इलाका फ़ोटोग्राफ़रों का पसंदीदा ऑटम स्पॉट माना जाता है। अक्टूबर-नवंबर में यहाँ लाजवाब ऑटम सीन देखने को मिलते हैं।
- होक्काइडो में जापान के पहले ऑटम सीज़न का अनुभव लिया जा सकता है।
- जापान में शरद ऋतु को ‘भूख बढ़ानेवाला मौसम’ भी कहा जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसमी व्यंजनों की भरमार रहती है।
सिनेमैटिक जापान!
जापान की खूबसूरती दुनियाभर के फ़िल्मकारों को हमेशा से लुभाती आई है। और जापान की इस खूबसूरती में ऑटम सीज़न का एक अलग ही चार्म है। लाल-नारंगी मेपल की पत्तियाँ, सुनहरे गिंको के पेड़, धुंध से घिरी पर्वतमालाएँ, शांत मंदिर और रंग-बिरंगी पगडंडियाँ, इन सबकी वजह से अक्टूबर से दिसंबर के बीच का जापान कई फ़िल्मों के लिए किसी रेडीमेड सेट जैसा लगता है। जापान के ऑटम का यह दिलकश रूप कई फ़िल्मों में भी देखने को मिलता है।
‘लॉस्ट इन ट्रांसलेशन’ फ़िल्म में टोकियो शहर की नियॉन लाइट्स और भीड़-भाड़ भरी सड़कों के साथ-साथ टोकियो के मौसमों की बदलती खूबसूरती भी देखने को मिलती है, जो कहानी को एक अलग विज़ुअल डेप्थ देती है। ‘मेमॉयर्स ऑफ़ अ गीशा’ में क्योटो के गियोन इलाके की पारंपरिक वास्तुकला,टी हाउस, तंग पगडंडियाँ और कुदरत, इन सबकी वजह से फ़िल्म को एक खास जापानी एस्थेटिक मिलता है। ऑटम के लाल-नारंगी रंगों में यह पारंपरिक दुनिया और भी दिलकश लगती है। जापान के ऑटम का एक और खूबसूरत सिनेमैटिक रूप दिखता है ‘स्वीट बीन’ जैसी जापानी फ़िल्मों में। टोकियो की एक छोटी-सी दुकान के इर्द-गिर्द बुनी गई यह शांत, नर्म-सी कहानी, कुदरत के छोटे-छोटे बदलावों को देखना सिखाती है। पेड़ों पर खिलते फूल, फ़ॉल सीज़न में झड़ते पत्ते और मौसम के साथ बदलती ज़िंदगी को देखते हुए, हम मंत्रमुग्ध हो जाते हैं।
जापानी स्टोरीटेलिंग में कुदरत सिर्फ़ बैकग्राउंड नहीं होती, बल्कि वह कहानी का ही एक किरदार होती है। और इसी लिए जापान का ऑटम देखते हुए अक्सर ऐसा लगता है मानो हम किसी फ़िल्म के सेट पर हों। इस सीज़न में हर दिन की अपनी एक कहानी होती है। अगर आप भी ऐसे सिनेमैटिक जापान का अनुभव लेना चाहते हैं, तो चलो जापान!
वीणा वर्ल्ड वूमन्स स्पेशल
खुशियों का नया रंग, जश्न का नया बहाना!
जापान का नाम लेते ही आँखों के सामने आता है चेरी ब्लॉसम का सीज़न, लेकिन ऑटम में जापान की खूबसूरती कुछ और ही होती है! शरद ऋतु के आगमन के साथ हरे-भरे पेड़ लाल, नारंगी, पीले और सुनहरे रंगों की छटाओं से सज जाते हैं। इन खूबसूरत ऑटम कलर्स का जी भरकर लुत्फ़ उठाते हुए, वीणा वर्ल्ड के वूमन्स स्पेशल जापान टूर में आइए और अनुभव कीजिए, टोकियो की जगमगाती दुनिया, माउंट फ़ुजी की विहंगम खूबसूरती,क्योटो के ऐतिहासिक मंदिर, अराशियामा के बाँस के घने जंगल और जापान की तेज़ रफ़्तार बुलेट ट्रेन। रंगों की इस बौछार को निहारते हुए आप सहेलियों के साथ फ़ोटो, शॉपिंग, गपशप और नए अनुभवों का मज़ा ले सकेंगी। साथ ही सफ़र में आपकी सुविधा का ख्याल रखनेवाला टूर मैनेजर तो है ही, जिससे आप जापान के हर रंग का दिल से आनंद ले सकेंगी। तो फिर इंतज़ार किस बात का? ऑटम के रंगों में रंगे जापान को सहेलियों के साथ एन्जॉय करने का यही तो खास वक्त है। चलो, बैग भरो, निकल पड़ो!
होक्काइडो: जापान का सबसे उत्तरी आइलैंड होक्काइडो वह जगह है, जहाँ देश में ऑटम सीज़न सबसे पहले दस्तक देता है। सितंबर के मध्य से ही यहाँ के पहाड़ों, वॉल्केनिक कॉम्प्लेक्सों और नेशनल पार्कों में पेड़ों की पत्तियाँ लाल, नारंगी और सुनहरी रंगोफ्ल से सजने लगती हैं। दाइसेत्सुज़ान नेशनल पार्क को ‘जापान का ऑटम गेटवे’ कहा जाता है, क्योंकि देश में ऑटम की सबसे पहली रंगत यहीं दिखाई देती है। साफ़ हवा, ठंडे मौसम और कुदरती नज़ारों की वजह से होक्काइडो ‘कोयो’ यानी ‘ऑटम फ़ॉलिएज’ का अनुभव लेने के लिए दुनिया भर के सैलानियों का पसंदीदा इलाका बन जाता है।
क्योटो: नवंबर में क्योटो का ऑटम सीज़न अपनी खूबसूरती के शिखर पर पहुँच जाता है। 1,600 से ज़्यादा बौद्ध मंदिरों, ज़ेन गार्डनों और सैकड़ों शिंतो श्राइनों के परिसरों में मेपल और गिंको के पेड़ लाल, नारंगी और सुनहरे रंगों से जगमगा उठते हैं। अराशियामा की खूबसूरत वैलीज़, कियोमिज़ु-देरा, एइकान-दो के बगीचे और तोफ़ुकु-जी टेम्पल में ‘मोमिजी’ के नज़ारे और नाइट इल्युमिनेशन्स इस मौसम का खास अनुभव माने जाते हैं। लाल मेपल के पेड़ों की छाँव से गुज़रते रास्तों, पारंपरिक पुलों और ऐतिहासिक मंदिरों की वजह से क्योटो को ऑटम फ़ोटोग्ऱाफी के लिए सबसे लोकप्रिय जगह माना जाता है।
माउंट फ़ुजी: माउंट फ़ुजी जापान का सबसे ऊँचा पर्वत है। अक्टूबर-नवंबर के दौरान ‘़माउंट फ़ुजी फ़ाइव लेक्स’ इलाके में ऑटम सीज़न की रंगतें निखरने लगती हैं। कावागुचिको लेक के किनारे का मशहूर मोमिजी कॉरिडोर लाल, नारंगी और सुनहरे मेपल के पेड़ों से सज जाता है, तो पीछे नज़र आता बर्फ़ से ढका फ़ुजी एक लाजवाब नज़ारा रच देता है। झीलों में झिलमिलाता फ़ुजी का अक्स, रोपवे से दिखते विहंगम नज़ारे और ऑनसेन का सुकून भरा अनुभव, इन सबकी वजह से ऑटम सीज़न में यह इलाका कुदरत के दीवानों, फ़ोटोग्ऱाफरों और सैलानियों के लिए जापान की सबसे आकर्षक जगहों में से एक बन जाता है।
टोकियो: ऑटम सीज़न में टोकियो शहर एक अलग ही रंग में रंग जाता है। नवंबर के मध्य से, शहर के गिंको और मेपल के पेड़ सुनहरे, लाल और नारंगी रंगों से सज जाते हैं। मेइजी जिंगू गाइएन में दोनों तऱफ खड़े लगभग 300 गिंको पेड़ों की शानदार कतार टोकियो की सबसे मशहूर ऑटम फ़ोटो लोकेशनों में से एक है। इसके अलावा उएनो पार्क, रिकुगिएन गार्डन, कोइशिकावा कोराकुएन और शोवा मेमोरियल पार्क में भी रंगों की लाजवाब बौछार देखने को मिलती है। आधुनिक शहरी ज़िंदगी और इस मौसम के कुदरती रंगों का अनोखा मेल, टोकियो के ऑटम अनुभव को खास बना देता है।
निक्को और नारा: जापान के निक्को और नारा ऑटम सीज़न के लिए मशहूर जगहें हैं। अक्टूबर में निक्को की चुज़ेनजी लेक और 97 मीटर ऊँचा केगॉन वॉटरफ़ॉल लाल, नारंगी और पीले रंगों से जगमगा उठते हैं। यहीं यूनेस्को वर्ल्ड हेरिटेज साइट तोशोगू श्राइन भी है। दूसरी ओर, जापान की प्राचीन राजधानी नारा नवंबर में रंग-बिरंगे पेड़ों से सज जाती है। 1,000 से ज़्यादा खुलेआम घूमते हिरणों के लिए मशहूर नारा पार्क, ऑटम में बेहद आकर्षक दिखता है। दुनिया की सबसे बड़ी काँसे की बुद्ध प्रतिमाओं में से एक जहाँ है वह तोदाइजी टेम्पल और प्राचीन कासुगा ताइशा श्राइन रंगीन पेड़ों के सान्निध्य में और भी खूबसूरत लगते हैं।
हाकोने-ऑनसेन: टोकियो के करीब बसा हाकोने जापान के सबसे लोकप्रिय पर्यटनस्थलों में से एक है। अक्टूबर के आखिर से नवंबर तक यहाँ की पर्वतमालाएँ लाल, नारंगी और सुनहरे रंगों से खिल उठती हैं। लेक आशी पर क्रूज़ से दिखती माउंट फ़ुजी की झलक इस इलाके का खास आकर्षण है। हाकोने रोपवे से ‘सल्फ़र वैली’ और रंग-बिरंगे पेड़ों का विहंगम नज़ारा दिखाई देता है। लेकिन हाकोने की असली पहचान हैं यहाँ के मशहूर ऑनसेन। गरम पानी के कुंडों में सुस्ताते हुए सामने दिखती ऑटम सीज़न की रंगतें, जापानी जीवनशैली का एक यादगार अनुभव बन जाती हैं।
वीणा वर्ल्ड टूर मैनेजर
जापान का ऑटम सीज़न, यानी हर दिन बदलते रंगों की एक जादुई दास्तान। लेकिन अगर इस रंगोत्सव के पीछे की कहानियों, परंपराओं और संस्कृति को समझ लिया जाए, तो यह सफ़र और भी सार्थक बन जाता है। टोकियो की आधुनिक जीवनशैली से लेकर क्योटो के प्राचीन मंदिरों तक, माउंट फ़ुजी के मनोरम नज़ारों से लेकर नारा और निक्को के शांत परिसरों तक, हर जगह के अनुभव को, और समृद्ध बनाने के लिए मैं आपके साथ रहता हूँ। बेहतरीन व्यू पॉइंट्स, किसी जगह जाने का सही समय, आकर्षक फ़ोटो स्टॉप्स, लोकल फूड, जापानी परंपराएँ और सफ़र की सटीक प्लानिंग, इन सबकी बदौलत आपका सफ़र आरामदेह और यादगार बन जाता है। उस अनुभव के हर रंग, हर पल और हर याद को मैं खास बनाता हूँ। तो आप भी चलिए जापान का यह रंगोत्सव देखने, मेरे साथ, वीणा वर्ल्ड के साथ!
इकिगाई के देश में... वीणा वर्ल्ड के साथ!
जापान का सफ़र हर किसी के लिए अलग हो सकता है। इसीलिए वीणा वर्ल्ड के पास आपकी अलग-अलग ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए कस्टमाइज़्ड हॉलिडेज़, कॉर्पोरेट और माइस टूर्स, ग्रुप टूर्स और सीनियर्स स्पेशल जैसे टूर ऑप्शन्स मौजूद हैं।
कस्टमाइज़्ड हॉलिडेज् - हर मुसाफ़िर की जापान देखने की ख्वाहिश अलग होती है। किसी को टोकियो की चहल-पहल भरी सड़कों पर शॉपिंग करनी होती है, किसी को क्योटो के मंदिरों में जापानी संस्कृति को महसूस करना होता है, तो किसी को माउंट ़फुजी के कुदरती माहौल में सुकून से वक्त बिताना होता है। ऐसे में वीणा वर्ल्ड के कस्टमाइज़्ड हॉलिडेज़, एक सही विकल्प साबित होते हैं। वीणा वर्ल्ड के ‘बेस्ट ऑफ़ जापान’ कस्टमाइज़्ड हॉलिडे में 9 दिनों में 4 शहरों को देखने का विकल्प उपलब्ध है। अपनी पसंद के मुताबिक जगहें, ठहरने की अवधि और अनुभवों की प्लानिंग की जा सकती है। इससे ग्रुप के तय शेड्यूल के बजाय अपनी पसंद-नापसंद को तरजीह देते हुए जापान का अनुभव लिया जा सकता है।
कॉर्पोरेट ट्रैवल (MICE) - बिज़नेस के सिलसिले में विदेश जाना हो और साथ ही उस देश की संस्कृति, आधुनिकता और खासियतों का अनुभव भी लेना हो, तो माइस टूर एक अलग विकल्प साबित होता है। कॉर्पोरेट मीटिंग, इंसेंटिव ट्रैवल, कॉन्फ़्रेंस और एग्ज़िबिशन के लिए वीणा वर्ल्ड की माइस टीम की मदद से आप अपने सफ़र की प्लानिंग कर सकते हैं। जापान जैसे टेक्नोलॉजी में आगे देश में कॉर्पोरेट सफ़र के साथ टोकियो की आधुनिकता, ओसाका का खान-पान या क्योटो की विरासत का अनुभव भी जोड़ा जा सकता है। काम के सिलसिले में शुरू हुए सफ़र से, आप जापान की यादें साथ लेकर लौट सकते हैं।
ग्रुप टूर - अगर आप पहली बार जापान जा रहे हैं, तो वहाँ की भाषा, ट्रेन व्यवस्था और अलग संस्कृति को लेकर उत्सुकता होना स्वाभाविक है। ऐसे में वीणा वर्ल्ड के ग्रुप टूर से सफ़र की प्लानिंग, प्लान्ड आइटिनरी और अनुभवी टूर मैनेजर का साथ मिलता है। इससे जापान के नए-नए अनुभव लेने पर ज़्यादा ध्यान दिया जा सकता है। वीणा वर्ल्ड के पास 7 दिनों का ‘बेस्ट ऑफ़ जापान विद नागोया’, 8 दिनों का ‘बेस्ट ऑफ़ जापान’, 9 दिनों का ‘वंडर्स ऑफ़ जापान’, तो 10 दिनों के ‘मार्वल्स ऑफ़ जापान’ और ‘जापान एक्सप्लोरर’ टूर हैं। साथ ही जापान को और भी विस्तार से देखने के लिए 13 दिनों का ‘एसेंस ऑफ़ जापान’ विकल्प भी उपलब्ध है। इन टूर्स में टोकियो के शिबुया क्रॉसिंग, असाकुसा और टोकियो स्काई ट्री से लेकर माउंट फ़ुजी इलाके के ओशिनो हक्काई और लेक आशी तक कई आकर्षणों का अनुभव लिया जा सकता है। शिंकानसेन बुलेट ट्रेन का अनुभव इस सफ़र का एक और यादगार हिस्सा बन जाता है।
सीनियर्स स्पेशल - कई बुज़ुर्ग सैलानियों का भी जापान देखने का सपना होता है, और सफ़र में उम्र से ज़्यादा अहमियत रखता है नई चीज़ें देखने और अनुभव करने का जज़्बा! वीणा वर्ल्ड का 7 दिनों का सीनियर्स स्पेशल जापान टूर बुज़ुर्ग सैलानियों को ग्रुप के साथ जापान घूमने का मौका देता है। टूर की बेहतरीन प्लानिंग और टूर मैनेजर के साथ की बदौलत, बुज़ुर्ग सैलानी जापान की संस्कृति का दिल से आनंद ले पाते हैं।
तो आप भी इनमें से अपने लिए सही विकल्प चुनिए और जापान की यादों की ओर पहला कदम बढ़ाइए।
ज़िंदगी में एक बार तो... यह करना है!
- नारा में हिरणों के साथ, मेपल के पेड़ों की छाया में ऑटम सीज़न का आनंद लेना है।
- झील में झिलमिलाते मेपल के पेड़ों के अक्स, कैमरे में कैद करने हैं।
- जापानी ऑनसेन में सुकून से बैठकर बाहर का रंग-बिरंगा नज़ारा देखना है।
- क्योटो में लाल मेपल के पेड़ों की छाँव तले इत्मीनान से टहलना है।
- अराशियामा के बाँस के जंगल में चलते हुए कुदरत की खामोशी को महसूस करना है।
- शिंकानसेन बुलेट ट्रेन से जापान के रंग-बिरंगे ग्रामीण इलाके देखने हैं।
- ऑटम सीज़न में खास जापानी व्यंजनों का ज़ायका चखना है।
- निक्को की पर्वतमालाओं में रंग बदलते जंगल देखने हैं।
- माउंट फ़ुजी और ऑटम कलर्स को एक ही फ़्रेम में कैद करना है।
- क्योटो के मंदिरों में नाइट इल्युमिनेशन देखना है।
- पारंपरिक जापानी टी सेरेमनी का हिस्सा बनना है।




































Post your Comment
Please let us know your thoughts on this story by leaving a comment.