Published in Navbharat Times 30th August 2026
दुनिया बुला रही है, हम तैयार हैं...!
हाल ही में मैं राजाध्यक्ष साड़ीज़ की सायली राजाध्यक्ष और उनकी बेटी सावनी, इस माँ-बेटी की जोड़ी के साथ एक पॉडकास्ट रिकॉर्ड कर रही थी। दोनों ने पूरे परिवार के साथ ट्रैवल करने की खूबसूरत बातें साझा कीं, लेकिन साथ ही यह भी बताया कि सिर्फ माँ-बेटी की अपनी हॉलिडे उनके लिए कितनी खास होती है। इसी बीच, पॉडकास्ट की रिकॉर्डिंग के दौरान मेरी बेटी, सारा का फोन आया। उसकी ग्रेजुएशन पूरी हो चुकी थी और वह पूछ रही थी कि क्या हम दोनों साथ में एक हॉलिडे पर जा सकते हैं, सिर्फ माँ-बेटी, और डेस्टिनेशन हो इस्तांबुल! इसके ठीक एक दिन पहले मैं पंद्रह दोस्तों के एक बेहद मस्त ग्रुप से मिली थी, जिन्होंने तय किया था कि इस साल आखिरकार वे सब साथ में ट्रैवल करेंगे। और पिछले ही हफ्ते, मैं IIM अहमदाबाद से लौटी थी, जहाँ मैं महिला उद्यमियों के लिए एक बिज़नेस एजुकेशन प्रोग्राम में हिस्सा ले रही थी। प्रोग्राम के आखिर में वे सभी मेरे पास एक ही बात लेकर आए, “प्लीज़, चलिए हम एक ऑल-वुमन ट्रिप करते हैं!” मैंने पूछा, “कहाँ जाना है?” जवाब तुरंत आया, “कहीं भी! इससे क्या फर्क पड़ता है? बस कुछ दिनों के लिए निकलना है, मस्ती करनी है, बेफ़िक्र रहना है और खुलकर एन्जॉय करना है।” वे लोकल डेलिकेसीज़ का स्वाद लेना चाहती थीं, थोड़ी विंडो शॉपिंग करना चाहती थीं, आसपास की खूबसूरती देखना चाहती थीं और सबसे ज़रूरी, रोज़मर्रा की जिम्मेदारियों की चिंता किए बिना एक-दूसरे के साथ का पूरा मज़ा लेना चाहती थीं।
इन सारी बातचीत में एक बात लगातार महसूस हुई, और वह थी आत्मविश्वास। आज की महिलाएँ दुनिया जीतने के लिए तैयार हैं! अपनी एनुअल हॉलिडे प्लान करते समय, USA में रहने वाली मेरी स्कूल की बेस्ट फ्रेंड्स ने कहा, “अभी सारे एडवेंचरस काम कर लेते हैं, ताकि बीस साल बाद स्लो ट्रैवल का मज़ा ले सकें।” चलो, वॉक करें, हाइक करें, फ्लाई करें और आसमान छू लें। एडवेंचर कोई भी हो, हम तैयार हैं!
कुछ साल पहले जो बीज हमने बोया था, उसे आज एक बड़े, खूबसूरत पेड़ में बदलते देखना हमारे लिए बेहद खुशी की बात है। महिलाओं का ट्रैवल सचमुच आज एक नए दौर में पहुँच चुका है। अब तो हम अक्सर महिलाओं को पूरे साल की हॉलिडे एक साथ प्लान और बुक करते हुए देखते हैं। चाहे आइसलैंड के ग्लेशियर्स पर चलना हो, केन्या में सफारी करनी हो, या हमारी अपनी गॉड्स ओन कंट्री, केरल के खूबसूरत बैकवॉटर्स में सेलिंग का मज़ा लेना हो, हमारे सामने एक पूरी दुनिया है, जो बस हमारे एक्सप्लोर करने का इंतज़ार कर रही है।
सायली के साथ पॉडकास्ट में हमारी एक और दिलचस्प बात हुई, जिसे कई महिलाएँ चुपचाप अपने साथ लेकर चलती हैं, और वह है गिल्ट। हम जब अपने लिए कुछ करते हैं, तो हमें गिल्ट क्यों महसूस होता है? चाहे हम प्रोफेशनल हों, एंटरप्रेन्योर हों या होममेकर, हॉलिडे लेने के लिए हमें गिल्ट महसूस करने की कोई ज़रूरत नहीं है। हम में से कुछ को लगता है कि हमारे बिना, घर पर कुछ भी ठीक से नहीं चल सकता। लेकिन सच हमेशा ऐसा नहीं होता। लोग एडजस्ट करना सीख लेते हैं, और कई बार हम जब थोड़ी देर के लिए पीछे हटते हैं, तभी सबको पता चलता है कि वे खुद कितना कुछ संभाल सकते हैं!
कहते हैं ना, “ज़िंदगी ना मिलेगी दोबारा।” और ट्रैवल जैसा कुछ भी नहीं, जो हमें एक नया नज़रिया दे, नई एनर्जी से भर दे और घर वापस लौटते समय हमें पूरी तरह रिफ्रेश महसूस कराए। तो आज सवाल यह नहीं है कि, “क्या मुझे ट्रैवल करना चाहिए?” असल सवाल हैं, “कहाँ जाना है?” और “क्या करना है?”
अब समय है सपनों को यादों में बदलने का और बकेट लिस्ट में लंबे समय से इंतज़ार कर रहे उन एक्सपीरियंसेज़ को एक-एक करके टिक करने का। वीणा वर्ल्ड की वुमन्स स्पेशल टूर्स आपको वही करने के लिए एक सेफ, वेलकमिंग और कम्फर्टेबल स्पेस देती हैं, चाहे आपके साथ कोई अपना आए या आप खुद अपनी पहली हिम्मत वाली स्टेप लें। हर उम्र की महिलाएँ हमारे साथ आ सकती हैं। आप किसी छोटे शहर से बड़े सपनों के साथ आती हों, बिज़ी लाइफ़ जी रही हों और एक रिफ्रेशिंग ब्रेक चाहती हों, होममेकर हों और कुछ अच्छी-सी ‘मी टाइम’ की हकदार हों, या फिर एडवेंचर की दीवानी हों और पूरी दुनिया एक्सप्लोर करने का मन रखती हों। आपकी उम्र, आपकी कहानी या आपका ट्रैवल स्टाइल कुछ भी हो, आपके लिए वीणा वर्ल्ड की एक टूर ज़रूर है। दुनिया बुला रही है। आइए, इसे साथ मिलकर एक्सप्लोर करें!
मैं यहाँ एन्जॉय कर रही हूँ... पर घरवालों का क्या?
मैं यहाँ मज़े कर रही हूँ, वहाँ घर पर सब ठीक तो होगा ना? सबने ठीक से खाना तो खाया होगा ना? ये ख़याल पीछा नहीं छोड़ते। पर सुनिए, हम ज़िंदगीभर सबका ख़याल रखती आई हैं। फिर कुछ दिन खुद के लिए निकाल लिए, तो इससे घरवालों के लिए हमारा प्यार कम नहीं होता। बल्कि हम ढेर सारी बातें, यादें, तस्वीरें लेकर एकदम तरोताज़ा होकर घर लौटते हैं। घर अपना ही है। घर के लोग भी अपने ही हैं। और ये चंद दिन? वो भी हमारे ही हैं ना!
मैंने तय किया। मैं निकल पड़ी।
उन्हें छुट्टी है क्या? बच्चों को समय मिलेगा क्या?
सहेलियाँ आएँगी क्या? बाकी सबका क्या?
कितनीही ट्रिप्स इन्हीं सवालों में उलझकर रह गईं।
पर फिर मैंने खुद से एक अलग ही सवाल पूछा, कि ‘मुझे जाना कहाँ है?’
और मैंने तय किया। मैंने बुकिंग की। और मैं निकल पड़ी। बस!
कभी-कभी डेस्टिनेशन से भी बड़ी अचीवमेंट यही होती है कि हम खुद के लिए खुद कोई ़फैसला लें।
मै किस तरह की ट्रैवलर हूँ?
माउंटन गर्ल - पहाड़ दिखते ही मैं खुश!
वॉटर बेबी - समंदर मतलब प्यार!
फोटो क्वीन - सबसे पहले फोटो!
शॉपिंग गर्ल - थोड़ी शॉपिंग तो चाहिए ही!
फूड एक्सप्लोरर - नई जगह, नया स्वाद!
एडवेंचर गर्ल - थ्रिल? आय एम इन!
कंट्री कलेक्टर - एक और पासपोर्ट स्टैम्प!
गर्ल-गैंग ट्रैवलर - बातें, सहेलियाँ, धमाल!
लग्ज़री लवर - कुछ तो खास चाहिए ही!
एक से ज़्यादा जवाब हैं? ऑ़फ कोर्स!
क्योंकि हम सब एक ही तरह के थोड़े ही हैं?
क्या मुझसे हो पाएगा? क्यों नही?
पहली बार अकेले निकल रही हो, तो मन में सवाल आना लाज़िमी है। मैं कभी एरोप्लेन में बैठी ही नहीं,
मुझे ठीक से इंग्लिश बोलना नहीं आता। एयरपोर्ट पर करना क्या होता है? इमिग्रेशन? वीज़ा? फॉरेन करंसी? क्या मुझसे ये सब हो पाएगा? हम में से कितनी ही महिलाओं के मन में कभी न कभी ये सवाल आए हैं। पर मज़ेदार बात ये है कि एक बार निकल पड़ने पर पहला एयरपोर्ट पार हो जाता है। पहला इमिग्रेशन हो जाता है। नए देश में हम खुद से कुछ कर दिखाते हैं और अचानक मन में आता है, “अरे वाह! मुझसे तो हो रहा है!” इसीलिए सफ़र में हम सिर्फ़ नई दुनिया नहीं देखते, अपने अंदर के नये ‘मैं’ से भी मिलते हैं।
अकेली आयी... पर अकेली रही नहीं!
वुमन्स स्पेशल पर अकेले आना और अकेला होना, ये दोनों बिल्कुल अलग बातें हैं। पहले दिन हम किसी को नहीं पहचानते। यहाँ हमें अपने ही तरह की सफ़र की शौक़ीन, नई जगहें देखने की चाहत रखनेवाली महिलाएँ मिलती हैं। कोई पहली बार आई होती है, तो कोई बार-बार आनेवाली, पर पहले दो-तीन दिनों में ही जान-पहचान हो जाती है, बातें रंग पकड़ती हैं और अच्छी दोस्ती भी हो जाती है। फिर कोई कहता है, “चाय लोगी?” कोई तस्वीर खींचता है। किसी के साथ हम सीट शेयर करते हैं। और देखते-देखते अपनी गैंग तैयार हो जाती है। वीणा वर्ल्ड की रूम पार्टनर गारंटी तो है ही। पर उससे भी ख़ूबसूरत बात क्या है, पता है? सफ़र की शुरुआत करते समय मैं अकेली आई थी, और लौटते व़क्त सहेलियाँ लेकर जा रही हूँ, ये एहसास!
अब मेरा मन मुझे कहाँ लिए जा रहा है?
- मुझमें छिपे ड्रीमर को - जापान, स्कैंडिनेविया, यूरोप
- मुझमें छिपे एडवेंचरर को - न्यूज़ीलैंड, अफ्रीका, अंदमान
- मुझमें छिपी माउंटन गर्ल को - कश्मीर, लद्दाख़, स्विट्ज़रलैंड
- मुझमें छिपे एक्सप्लोरर को - वियतनाम, इजिप्ट, भूटान
- मुझमें छिपी रोमँटिक गर्ल को - ग्रीस, मालदीव, बाली
- मुझमें छिपी इंडिया लवर को - केरल, राजस्थान, नॉर्थ ईस्ट
दुनिया एक ही है। पर उसे महसूस करने के हमारे रास्ते कितने अलग-अलग हैं!
मैं ही अपनी रानी हूँ!
हम में से हर एक के अंदर एक क्वीन होती ही है। उसे किसी और के ताज की ज़रूरत नहीं होती।
वो अपने मन की, अपनी ज़िंदगी की, अपनी दुनिया की रानी होती है। और वुमन्स स्पेशल पर एक शाम होती है, अपनी उस ‘मैं’ को दिल खोलकर सेलिब्रेट करने की! मन-मुताबिक सजना है। रैंप पर चलना है। दिल खोलकर इतराना है। और अपना पल बिल्कुल अपने ही अंदाज़ में जीना है! उम्र, आकार, रंग, कौन क्या कहेगा, इसकी फ़िक्र नहीं करनी। क्योंकि अपनी रानी मैं खुद ही हूँ! और इन सभी क्वीन्स में से हम चुनते हैं उस टूर की एक ख़ास वीणा वर्ल्ड क्वीन।
सो, ड्रेस अप। वॉक द रैंप। ओन योर मोमेंट।
मेरी ड्रीम लिस्ट
- सातों कॉन्टिनेंट्स घूमने हैं।
- नॉर्दर्न लाइट्स देखनी हैं।
- अफ्रीकन बिग फ़ाइव देखने हैं।
- हॉट एयर बलून से सनराइज़ देखना है।
- दुनिया की किसी मशहूर सिनिक ट्रेन जर्नी का अनुभव लेना है।
- दुनिया की एक शानदार रोड ट्रिप करनी है।
- दुनिया का कोई बड़ा फेस्टिवल वहाँ के स्थानीय लोगों के साथ मनाना है।
- 25 देश घूमने हैं।
- उसके बाद 50 देश देखने हैं।
- और कभी न कभी 100 देशों का आँकड़ा भी छूना है!
ये सब आज ही हो जाएगा, ऐसा नहीं। कुछ इस साल। कुछ अगले साल। तो कुछ कभी और। लेकिन अगर ये मेरी लिस्ट में है, तो इसका मतलब ये है कि ये एक दिन होकर रहेगा!
मेरी ट्रैवल गैंग कौन सी है?
- आप अपनी अगली ट्रिप किसके साथ करेंगी?
- स्कूल की सहेलियाँ कॉलेज गैंग बहनें / कज़िन्स
- ऑफ़िस की सहेलियाँ माँ और मैं मेरी बेस्ट फ्रेंड
- फैमिली की महिलाएँ अभी तक अनजान नई सहेलियाँ सिर्फ़ मैं!
- गैंग तय हो गई? अब डेस्टिनेशन तय करना है!
माय नेक्स्ट फर्स्ट!
हम कितना भी घूम लें, स़फर में एक मज़ा हमेशा बना
रहता है। अब भी कुछ न कुछ ‘पहली बार’ करना बाकी
रहता है! ऐसा आपका क्या बचा है?
पहला स्नो फॉल पहला क्रूज़ पहली स्कूबा डाइविंग
पहली सफ़ारी पहली स्काईडाइविंग पहला ग्लेशियर वॉक पहली इंटरनेशनल ट्रिप पहला गर्ल्स-ओनली हॉलिडे पहला नया कॉन्टिनेंट देखना
तो बताइए, वॉट्स योर नेक्स्ट फर्स्ट?
अभी बहुतकुछ देखना है...महसूस करना है। मेरी लिस्ट बढ़ती रहेगी और मेरा सफ़र भी।






































Post your Comment
Please let us know your thoughts on this story by leaving a comment.