Published in the Sunday Navbharat Times on 26 April 2026
...ऊपर अगर बारिश हो रही हो, तो होने दीजिए। नीचे एक ऐसी दुनिया है, जो शांत, रहस्यमय और ज़्यादातर पर्यटकों से अब भी अनदेखी है...
होटल बुक करते वक़्त मुझे शायद ही कभी निराशा होती है, लेकिन कुछ साल पहले लंदन में ऑक्सफ़ोर्ड स्ट्रीट के पास चेक-इन करते हुए मेरे चेहरे पर मायूसी साफ झलक रही थी। लोकेशन बेहतरीन थी। मार्बल आर्च कुछ ही कदम दूर था और मैं शॉपिंग हब के ठीक पीछे थी। लेकिन समस्या यह थी कि मेरा कमरा अंडरग्राउंड था। सिंगल रूम होने के कारण वह और भी छोटा लग रहा था। लंदन में रहते हुए बेसमेंट फ्लैट्स के बारे में जानती थी, लेकिन खुद वहाँ रुकना कभी नहीं सोचा था।
मैं सोचती रह गई कि कोई अंडरग्राउंड रहना क्यों चुनेगा। सब कुछ सीलन भरा लग रहा था और कुदरती रोशनी नहीं थी। ज़िंदगी तो ज़मीन के ऊपर ही होनी चाहिए, है ना? फिर भी हम कैपेडोसिया के नीचे डेरिंकुयू, बुडापेस्ट के गुफा-चर्च, और पेरिस के कैटाकॉम्ब्स जैसी जगहों के बारे में सुनते हैं। शहर घूमते समय हम ऊपर की खूबसूरती देखते हैं, लेकिन नीचे की दुनिया को अक्सर भूल जाते हैं। कई महान शहरों के नीचे एक अलग ही जीवन बसता है।
मुझे मेलबर्न, ज़्यूरिख और मॉन्ट्रियल याद आते हैं, जहाँ अंडरग्राउंड शॉपिंग आर्केड्स, पैसेज और ट्रांसपोर्ट सिस्टम्स में बिना मौसम की परवाह किए ज़िंदगी चलती रहती है। अंडरग्राउंड जीवन नया नहीं है। हमारे पूर्वजों ने इसे सुरक्षा, भंडारण, आस्था और जीवन के लिए अपनाया था। इनमें से कई जगहें इतनी अद्भुत हैं कि एक बार देखने के बाद अंडरग्राउंड आपको कभी अंधेरा या नीरस नहीं लगेगा।
जहाँ से सब शुरू हुआ: धरती के नीचे की किंवदंती
इंजीनियरों के टनल और मेट्रो सिस्टम बनाने से बहुत पहले, अंडरग्राउंड जाने का विचार शायद पौराणिक कथाओं से शुरू हुआ। प्राचीन ईरानी परंपरा, जो ज़ोरोस्ट्रियन धर्म से जुड़ी है, अहुरा मज़्दा की बात करती है, जिन्होंने लोगों को ‘मल्कुश के दिन’ नाम की विनाशकारी सर्दी से बचने के लिए भूमिगत आश्रय बनाने का निर्देश दिया था। माना जाता है कि उस समय ज़मीन के ऊपर का माहौल बेहद ख़तरनाक हो गया था और इंसान को नीचे पनाह लेनी पड़ी।
चाहे इसे किंवदंती मानें या प्रतीकात्मक स्मृति, यह कहानी गहरा असर छोड़ती है। यह दिखाती है कि अंडरग्राउंड शहर ऐशो-आराम से नहीं, बल्कि ज़रूरत से पैदा हुए। वे हिफाज़त, बचाव और उम्मीद की जगह थे। आधुनिक विज्ञान भी बताता है कि लगभग १२,००० साल पहले ‘यंगर ड्रायस’ नाम का एक तीव्र शीत दौर आया, जो हिमयुग जैसी स्थितियों की अचानक वापसी था। क्या ऐसी घटनाओं ने इन कहानियों को जन्म दिया, यह निश्चित नहीं है।
लेकिन एक बात साफ़ है कि जब ख़तरा ऊपर से आया, तो इंसान ने नीचे शरण ली। दुनिया भर के अंडरग्राउंड शहरों को देखने पर यही एहसास होता है कि लगभग हर देश में ऐसी कोई न कोई जगह ज़रूर मौजूद है।
पोलैंड - वियेलिज़्का का अंडरग्राउंड साल्ट कैथेड्रल
अगर कोई अंडरग्राउंड जगह मेरे जैसे संशयवादी को भी पल भर में बदल सकती है, तो वह है वियेलिच्का साल्ट माइन। इसे सिर्फ खदान कहना नाइंसाफी होगी, क्योंकि यह इंसानी हाथों से तराशा गया एक अंडरग्राउंड महल है। सदियों से खनिकों ने नमक के कक्षों को कला में बदला है। झाड़-फानूस, संतों और राजाओं की मूर्तियाँ, और विशाल हॉल, जिनकी चमकती छतें हल्की रोशनी में झिलमिलाती हैं, यह सब मिलकर इसे अद्भुत बनाते हैं।
इसका सबसे खास हिस्सा है सेंट किंगा चैपल, जो पूरी तरह नमक से तराशा गया एक कैथेड्रल है। यहाँ एक गहरी भावनात्मक अनुभूति होती है, उन मजदूरों की याद में जिन्होंने अंधेरे में इतनी खूबसूरती रची। यह जगह जादुई, आध्यात्मिक और लगभग अविश्वसनीय लगती है।
क्यों जाएँ: क्योंकि यह धरती की सबसे खूबसूरत और अनोखी खदानों में से एक है।
तुर्की - डेरिंकुयू, कैपेडोसिया के नीचे खोया हुआ शहर
कल्पना कीजिए कि आप अपने घर में एक दरवाज़ा खोलें और नीचे एक पूरा शहर मिले। डेरिंकुयू अंडरग्राउंड सिटी १९६३ में ऐसे ही खोजी गई, जब एक निवासी को दीवार के पीछे सुरंगें मिलीं। कैपेडोसिया के नीचे छिपा यह बहुमंज़िला शहर रसोई, कुएँ, वेंटिलेशन शाफ्ट, चैपल, तबेले और रहने की जगहों से बना था, जहाँ लगभग २०,००० लोग शरण ले सकते थे।
आज यहाँ चलना एक अनोखा अनुभव है। पत्थर के दरवाज़े खतरे के समय रास्तों को बंद कर देते थे, वेंटिलेशन शाफ्ट ताज़ी हवा देते थे और कुएँ जीवन बनाए रखते थे। यह सिर्फ गुफा नहीं, बल्कि प्राचीन समय की सोच-समझकर बनाई गई शहरी संरचना है, जो जीवटता और कारीगरी का उदाहरण है।
क्यों जाएँ: मानवता के सबसे अद्भुत छिपे हुए इंजीनियरिंग चमत्कारों में से एक को महसूस करने के लिए।
पेरिस - ऊपर रूमानियत, नीचे रहस्य
मुझे पेरिस की अपनी पहली यात्रा आज भी याद है। शैंज़-ए-लीज़े पर बैठकर कॉफी और मकारोन का आनंद लेने का सपना था। यह शहर अपने बुल्वार्ड्स, पुलों और कैफे के लिए मशहूर है, लेकिन इस नफ़ासत के नीचे एक बिल्कुल अलग दुनिया छिपी है।
पेरिस के कैटाकॉम्ब्स दुनिया के सबसे सिहरन पैदा करने वाले आकर्षणों में से एक हैं। मीलों लंबी सुरंगों में करोड़ों लोगों की हड्डियाँ करीने से सजी हैं। यह इतिहास की कहानी कहती हैं, उन चूना पत्थर की खदानों से लेकर उस सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट तक, जिसने 18वीं सदी में अवशेषों को यहाँ स्थानांतरित करने पर मजबूर किया।
इन मद्धम रोशनी वाले गलियारों में चलना एक अलग ही अनुभव है। गहरी ख़ामोशी और हड्डियों की अनंत कतारों के बीच यह जगह रहस्यमय और मार्मिक लगती है। यह पेरिस के नीचे छिपी एक अनोखी दुनिया की झलक है।
क्यों जाएँ: क्योंकि यहाँ खूबसूरती और रहस्य का ऐसा अनोखा संगम कहीं और देखने को नहीं मिलता।
प्राग - छुपे हुए तहख़ानों और अंडरग्राउंड क़ैफे का शहर
मैं प्राग तीन बार जा चुकी हूँ और हर बार उससे और भी ज़्यादा जुड़ाव महसूस हुआ है। यह शहर रंग-बिरंगे आर्किटेक्चर, कोबलस्टोन गलियों और ऊँची गॉथिक मीनारों से सजा हुआ है। पिछले अक्टूबर में अपनी बेटी सारा के साथ यहाँ घूमते हुए, हम बार-बार एस्ट्रोनॉमिकल क्लॉक के पास लौटते रहे। थकान के बीच जब हम कॉफी ढूंढ रहे थे, तब हमारे गाइड ने हमें एक अनोखी जगह दिखाई। क्लॉक के सामने ही नीचे जाती सीढ़ियाँ, जो एक अंडरग्राउंड कैफे तक ले जाती थीं।
यह ‘रेस्टोरेंट 420’ का कैफे था, जिसका नाम चेक रिपब्लिक के इंटरनेशनल कोड +४२० पर रखा गया है। यहाँ ताज़ी ब्रेड और स्थानीय पकवान कोलाचे एक पुराने मध्यकालीन तहखाने में परोसे जाते हैं, जो आज भी उतना ही जीवंत और आकर्षक है। प्राग में ऐसे कई छुपे हुए कैफे और बार हैं, और उन्हें खोजते रहना ही इस शहर के जादू का हिस्सा है।
क्यों जाएँ: क्योंकि प्राग के कुछ सबसे खास अनुभव सड़क के नीचे छिपे हुए हैं।
बुडापेस्ट - शहर के नीचे थर्मल ब्यूटी
प्राग से मेरा सफर बुडापेस्ट तक पहुँचा, जो हाब्सबर्ग आर्किटेक्चर, डैन्यूब के नज़ारों और थर्मल स्पा के लिए मशहूर है। लेकिन इस शहर के नीचे गुफाओं, सुरंगों और छुपे कक्षों की एक अलग ही दुनिया बसी है। बुडापेस्ट एक जुड़वाँ शहर है। समतल पेस्ट नदी के उस पार फैला है, जबकि बुडा की पहाड़ियों में लगभग २०० गुफाएँ हैं, जिनमें कई थर्मल पानी से बनी हैं।
इनमें से स्ज़ेम्लो हिल केव अपनी क्रिस्टल आकृतियों के लिए जानी जाती है, जबकि पाल्वोल्जी केव स्टैलेक्टाइट्स और स्टैलेग्माइट्स से भरी है और लंबे गुफा नेटवर्क का हिस्सा है, जहाँ संकरे रास्तों और अंडरग्राउंड कक्षों को देखा जा सकता है। कैसल हिल के नीचे हॉस्पिटल इन द रॉक, जो कभी युद्धकालीन अस्पताल और बाद में कोल्ड वॉर बंकर था, आज एक संग्रहालय है। पास ही लैबिरिंथ है, जो पनाहगाह, वाइन सेलर और सैन्य सुरंग के रूप में इस्तेमाल हुआ, और गेलर्ट हिल का केव चर्च भी अपनी अलग पहचान रखता है।
क्यों जाएँ: क्योंकि बहुत कम शहर आपको ऊपर थर्मल बाथ्स का आनंद और नीचे गुफाओं, बंकरों और इतिहास से भरी दुनिया का अनुभव एक साथ देते हैं।
लंदन - चर्चिल के सीक्रेट वॉर रूम्स
लंदन में एक जगह जो आज भी मेरी बकेट लिस्ट में है, वह वेस्टमिंस्टर के नीचे स्थित चर्चिल वॉर रूम्स है, जो ब्रिटेन के सबसे रोचक संग्रहालयों में गिनी जाती है। व्हाइटहॉल के नीचे उतरते ही आप उस संरक्षित नर्व सेंटर में पहुँचते हैं, जहाँ से दूसरे विश्व युद्ध के दौरान अहम फैसले लिए गए थे। दीवारों पर नक्शे अब भी पिन किए हुए हैं, बंकरों में डेस्क और टेलीफोन रखे हैं, और कमरे जैसे समय में थमे हुए लगते हैं।
यहाँ उस दौर की बेचैनी लगभग महसूस होती है। तनाव, सिगरेट का धुआँ और वे कठिन फैसले, जो उस समय लिए गए होंगे। जब आप बाहर आधुनिक लंदन में लौटते हैं, तो शहर आपको अलग नज़र आता है। तब एहसास होता है कि उसकी सड़कों के नीचे क्या चल रहा था, जब ऊपर बम बरस रहे थे।
क्यों जाएँ: क्योंकि यहाँ इतिहास सिर्फ देखा नहीं, बल्कि महसूस किया जा सकता है।
सिएटल - अपने ही ऊपर दोबारा बसा शहर
मैं इस साल सिएटल जाने वाली हूँ, और अंडरग्राउंड टूर मेरी सूची में सबसे ऊपर है। सिएटल की कहानी 1889 की ग्रेट सिएटल फायर से शुरू होती है, जिसने लकड़ी के डाउनटाउन का बड़ा हिस्सा तबाह कर दिया। लेकिन इसी के साथ शहर को एक पुरानी समस्या सुलझाने का मौका मिला, क्योंकि निचली सड़कों में ज्वार के समय सीवेज भर जाता था।
पुनर्निर्माण के दौरान शहर ने सड़कों का स्तर एक से दो मंज़िल ऊपर उठाया और मजबूत पत्थर व ईंट की इमारतें बनाई। कुछ समय तक लोग पुराने फुटपाथों और नई सड़कों के बीच सीढ़ियों से आते-जाते रहे। धीरे-धीरे पुराना ग्राउंड फ्लोर नीचे दब गया और ‘अंडरग्राउंड सिएटल’ बन गया।
आज यहाँ आने वाले लोग इन संरक्षित रास्तों से गुजरते हुए आधुनिक सड़कों के नीचे छिपे पुराने शहर के अवशेष देख सकते हैं, जो इतिहास को जीवंत कर देते हैं।
क्यों जाएँ: क्योंकि यहाँ आपको एक जीवित शहर के नीचे छिपा पूरा पुराना डाउनटाउन देखने का अनोखा मौका मिलता है।
कैन्सस सिटी - धरती के नीचे का बिज़नेस साम्राज्य
अंत में बात करते हैं दुनिया के सबसे बड़े अंडरग्राउंड कॉम्प्लेक्स की, जो कैन्सस सिटी में स्थित है। बाकी जगहों की तरह युद्ध या तबाही से नहीं, बल्कि नए सिरे से निर्माण की सोच से इसका विकास हुआ। 20वीं सदी में यहाँ चूना पत्थर की खदानें बनाई गईं और बाद में इन्हें एक अनोखे उपयोग में बदल दिया गया।
नतीजा है सबट्रोपोलिस, जो दुनिया के सबसे बड़े अंडरग्राउंड बिज़नेस हब्स में से एक है। लाखों वर्ग फीट में फैले इस परिसर में वेयरहाउस, दफ़्तर, अभिलेखागार, मैन्युफैक्चरिंग और लॉजिस्टिक्स सेंटर मौजूद हैं। यहाँ का स्थिर तापमान ऊर्जा लागत कम करता है और इसे उद्योग व भंडारण के लिए आदर्श बनाता है। चौड़ी सुरंगें सड़कों की तरह काम करती हैं, जहाँ ट्रक आसानी से आवाजाही करते हैं।
दिलचस्प बात यह है कि यही सुरंगें ‘ग्राउंडहॉग रन’ जैसी रेस की मेज़बानी भी करती हैं, जहाँ एथलीट सर्दियों में अंडरग्राउंड दौड़ लगाते हैं। कैन्सस सिटी दिखाता है कि अंडरग्राउंड दुनिया सिर्फ इतिहास नहीं, बल्कि भविष्य की संभावनाओं और अनुभवों का भी हिस्सा है।
क्यों जाएँ: क्योंकि यहाँ आप ज़मीन के नीचे बसे एक पूरे सक्रिय बिज़नेस शहर को देख सकते हैं और एक अनोखे अनुभव का हिस्सा बन सकते हैं।
हमारे कदमों के नीचे छिपी इस दुनिया को जानने के इतने कारण हैं। प्राचीन शहरों और गुफाओं से लेकर आधुनिक इंजीनियरिंग चमत्कारों तक, यह सफर और भी रोमांचक लगता है। अब तो मन करता है कि कभी सबट्रोपोलिस में दौड़ लगाऊँ, मॉन्ट्रियल के रेसो में घूमूँ, या फिर बुडापेस्ट और प्राग के नीचे फिर से खो जाऊँ।
ऊपर अगर बारिश हो रही हो, तो होने दीजिए। नीचे एक ऐसी दुनिया है, जो शांत, रहस्यमय और ज़्यादातर पर्यटकोफ्ल से अब भी अनदेखी है।
तो बताइए, आपकी लिस्ट में सबसे पहले कौन-सा अंडरग्राउंड शहर होगा?
और अगर ऊपर बारिश हो रही हो, तो होने दीजिए। मैं नीचे बख़ूबी संतुष्ट रहूँगी, एक ऐसी दुनिया को ढूँढते हुए जिसे ज़्यादातर मुसा़िफर कभी देख ही नहीं पाते।
तो बताइए, आपकी लिस्ट में पहले नंबर पर कौन-सा अंडरग्राउंड शहर होगा?


























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